सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र में पुरानी लाइसेंस प्रणाली को खत्म करके उसकी जगह एक नई ‘मंजूरी आधारित व्यवस्था’ लागू करने के नियम जारी कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था में कंपनियों को पहले की तरह जटिल लाइसेंस प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा, बल्कि उन्हें तय शर्तों के आधार पर अनुमति लेनी होगी। इससे प्रक्रिया ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी।
जुड़े नियमों का मसौदा पांच सितंबर, 2025 को जारी किया गया था।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने ‘टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल’ को भी लागू करने की अधिसूचना जारी की है। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जिसकी मदद से दूरसंचार अधिनियम के नियमों को ऑनलाइन तरीके से लागू और मैनेज किया जा सकेगा। इससे सेवाएं ज्यादा पारदर्शी और डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगी।
दूरसंचार अधिनियम के तहत अधिसूचित नियमों में ’दूरसंचार (मुख्य दूरसंचार सेवाओं के प्रावधान के लिए मंजूरी) नियम, 2025’ शामिल हैं। ये नियम दूरसंचार कंपनियों को पुरानी लाइसेंस व्यवस्था से नए मंजूरी आधारित ढांचे में स्थानांतरित करते हैं।
सुझावों पर सरकार ने दिया ध्यान
दूरसंचार विभाग की अधिसूचना के अनुसार, इस नए नियमों का प्रारंभिक मसौदा 5 सितंबर 2025 को जारी किया गया था और उस पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए थे। इसके बाद लोगों और संबंधित पक्षों से मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं पर सरकार ने ध्यान से विचार किया। इन सभी सुझावों को शामिल करने के बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया गया है।
नए नियमों के तहत कोई भी पात्र इकाई दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकती है। वे नेटवर्क सेवा ऑपरेटर (एनएसओ), वर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटर (वीएनओ) या दोनों के रूप में मंजूरी के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसके दायरे में राष्ट्रीय सेवा क्षेत्र के लिए एकीकृत सेवा मंजूरी, एक या अधिक सेवा क्षेत्रों के लिए एक्सेस सेवा मंजूरी, वायरलाइन एक्सेस सेवा मंजूरी, राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर के लिए इंटरनेट सेवा और लंबी दूरी की सेवा (लॉन्ग डिस्टेंस सर्विस) की मंजूरी प्राधिकरण शामिल हैं। नियमों के मुताबिक, सैटेलाइट (उपग्रह) नेटवर्क स्थापित करने, संचालित करने या उसका विस्तार करने की इच्छुक किसी भी कंपनी को सरकार से अलग से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए कंपनियों को उपग्रहों, अंतरिक्ष क्षमता और गेटवे बुनियादी ढांचे का पूरा विवरण देना होगा।
(इनपुट-भाषा)
