Meta के नए नियमों से वेबसाइटों की बढ़ी चिंता, जानें क्या है पूरा मामला

Meta के नए कमर्शियल नियमों को लेकर वेबसाइट मालिकों और न्यूज पब्लिशर्स की चिंता बढ़ गई है। विवाद वेबसाइटों के कंटेंट को ऑटोमेटिक तरीके से पढ़ने और इस्तेमाल करने की अनुमति को लेकर है। कंपनी ने नियमों में कुछ बदलाव भी किए हैं।

फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी Meta अपनी कमर्शियल शर्तों में बदलाव कर रही है। इन नियमों का असर उन कारोबारों और मीडिया संस्थानों पर पड़ सकता है, जो अपने बिजनेस या प्रमोशन के लिए Meta के प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते हैं। विवाद इस बात पर है कि Meta की ऑटोमेटिक सिस्टम यानी वेब क्रॉलर ऐसी वेबसाइटों के पेज और कंटेंट तक पहुंच सकते हैं, जो किसी बिजनेस से जुड़े हैं। इसमें न्यूज वेबसाइटों का कंटेंट भी शामिल हो सकता है। पब्लिशर्स को डर है कि उनके लेखों और दूसरे कंटेंट का इस्तेमाल उनकी स्पष्ट अनुमति या भुगतान के बिना किया जा सकता है।

Meta

क्या Meta वेबसाइटों का कंटेंट AI को सिखाने में इस्तेमाल करेगी?

शुरुआत में Meta की प्रस्तावित शर्तों में वेबसाइटों से जुटाए गए कंटेंट का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट्स और सेवाओं को विकसित करने, सुधारने, रिसर्च करने और ट्रेनिंग देने जैसी गतिविधियों के लिए करने की भाषा शामिल थी। इससे आशंका पैदा हुई कि वेबसाइटों के लेखों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए किया जा सकता है। पब्लिशर्स और कानूनी विशेषज्ञों ने इस भाषा पर सवाल उठाए। इसके बाद Meta ने शर्तों में बदलाव किया और कंटेंट को इस्तेमाल करने के उद्देश्य से ट्रेनिंग का स्पष्ट उल्लेख हटा दिया। संशोधित भाषा में विज्ञापन और बिजनेस प्रोडक्ट्स को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। हालांकि, वेबसाइटों को ऑटोमेटिक तरीके से क्रॉल करने की अनुमति से जुड़ी शर्त बनी हुई है।

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