भारत 'डिजिटल उपनिवेश' बनने से बचने के लिए खुद एआई प्रौद्योगिकियां विकसित करे: विवेक राघवन

’इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में राघवन ने कहा, ’’ एआई एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसका मानव जीवन के हर पहलू पर प्रभाव पड़ता है। यह एक ऐसी मुख्य प्रौद्योगिकी है जिसे भारत जैसे देश को बुनियादी स्तर से समझना होगा।

स्वदेशी एआई स्टार्टअप कंपनी सर्वम एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने शुक्रवार को कहा कि भारत को विदेशी प्रणालियों पर निर्भर "डिजिटल उपनिवेश" बनने से बचने के लिए अपनी खुद की बुनियादी एआई प्रौद्योगिकियां विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) एक ऐसी आधारभूत प्रौद्योगिकी है जो जीवन के हर पहलू को आकार देगी। इसलिए भारत के पास इसे बिल्कुल शुरुआत से विकसित करने का विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य जिम्मेदारी है।

Sarvam

सर्वम एआई भारत की एआई स्टार्टअप कंपनी है।

’इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में राघवन ने कहा, ’’ एआई एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसका मानव जीवन के हर पहलू पर प्रभाव पड़ता है। यह एक ऐसी मुख्य प्रौद्योगिकी है जिसे भारत जैसे देश को बुनियादी स्तर से समझना होगा। अन्यथा, हम इस महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर एक डिजिटल उपनिवेश बन जाएंगे। हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह कुछ ऐसा है जिसे हमें करना ही होगा।’’

End of Feed