Google ने 29 जुलाई 2026 से लागू होने वाले Google Play Terms of Service का नया अपडेट जारी किया है। इसमें कई नियमों को बदला और पहले से ज्यादा साफ तरीके से समझाया गया है। सबसे ज्यादा चर्चा उन नियमों की हो रही है जो बैकग्राउंड में चलने वाली सिस्टम सर्विसेज, मोबाइल डेटा के इस्तेमाल और सब्सक्रिप्शन की बिलिंग से जुड़े हैं।
कई सारी ऐप्स बैकग्राउंड में डेटा का इस्तेमाल करती रहती हैं। (फोटो क्रेडिट-Digit)
नए अपडेट में Google ने पहली बार बताया है कि Android फोन की कुछ सिस्टम सर्विसेज बैकग्राउंड में भी काम करती रहती हैं। यानी, जब आप किसी ऐप का इस्तेमाल नहीं कर रहे होते, तब भी ये सर्विसेज जरूरी कामों के लिए इंटरनेट और मोबाइल डेटा का इस्तेमाल कर सकती हैं।
बैकग्राउंड में भी इस्तेमाल होगा मोबाइल डेटा
नए नियमों में Google ने "System Services" नाम से एक नया सेक्शन जोड़ा है। इसमें बताया गया है कि Google Play Store, Google Play Services, Android के सिस्टम अपडेट और दूसरी जरूरी सिस्टम सर्विसेज इसी का हिस्सा हैं।
Google के मुताबिक, ये सर्विसेज आपके फोन को सुरक्षित रखने और समय-समय पर अपडेट करने के लिए बैकग्राउंड में लगातार इंटरनेट से जुड़ी रहती हैं। इसलिए कई बार आपका मोबाइल डेटा तब भी इस्तेमाल हो सकता है, जब फोन इस्तेमाल नहीं हो रहा हो या उसकी स्क्रीन लॉक हो। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इनमें से कुछ काम अपने आप बैकग्राउंड में होते रहते हैं और इसके लिए यूजर को कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती।
डेटा चार्ज की जिम्मेदारी यूजर की
नए नियमों में Google ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर उसकी सिस्टम सर्विसेज बैकग्राउंड में इंटरनेट या मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करती हैं, तो उससे होने वाले डेटा खर्च या टेलीकॉम कंपनी के किसी भी चार्ज की जिम्मेदारी यूजर की होगी। यानी अगर सिस्टम अपडेट या Google की दूसरी सर्विसेज बैकग्राउंड में चलकर आपका मोबाइल डेटा इस्तेमाल करती हैं, तो उसका खर्च आपको ही उठाना होगा। इसके लिए Google जिम्मेदार नहीं होगा।
कानूनी विवाद के बाद आया बदलाव
Google ने नियमों में यह बदलाव ऐसे समय किया है, जब कुछ महीने पहले कंपनी ने एक कानूनी विवाद खत्म करने के लिए 135 मिलियन डॉलर में समझौता किया था। आरोप था कि Android फोन इस्तेमाल न होने या Idle मोड में होने पर भी बिना यूजर की जानकारी के Google को मोबाइल डेटा भेज रहे थे।
हालांकि, नए नियमों में Google ने इस मामले का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया है। लेकिन जानकारों का मानना है कि बैकग्राउंड में डेटा के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा पारदर्शिता और साफ जानकारी देने के लिए कंपनी ने यह नया सेक्शन जोड़ा है।
यूजर्स के लिए क्या मायने हैं?
नए नियमों के बाद Android यूजर्स को यह समझने में आसानी होगी कि उनके फोन में Google की कौन-सी सिस्टम सेवाएं बैकग्राउंड में काम करती हैं और वे कब मोबाइल डेटा का उपयोग कर सकती हैं। यदि आप सीमित डेटा प्लान का इस्तेमाल करते हैं, तो बैकग्राउंड डेटा सेटिंग्स और सिस्टम अपडेट्स पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो सकता है।
