सोशल मीडिया पर Meta को लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि कंपनी ने सरकार की ओर से लागू किए गए तीन घंटे के कंटेंट टेकडाउन नियम का पालन करने के लिए कंटेंट ब्लॉकिंग को ऑटोमेट कर दिया है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कंटेंट ब्लॉक करने की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई। अब PIB Fact Check ने इस दावे को भ्रामक बताया है और तीन घंटे में कंटेंट हटाने से जुड़े नियम और Meta के साथ API इंटीग्रेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।
फरवरी 2026 में 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे किया गया समय (Photo: Unsplash)
फरवरी 2026 में 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे किया गया समय
PIB Fact Check के मुताबिक, गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने के लिए IT Intermediaries Rules, 2021 में फरवरी 2026 में संशोधन किया गया था। इसके तहत गैरकानूनी कंटेंट हटाने के लिए तय समयसीमा को पहले के 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दिया गया।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। हालांकि, PIB ने यह स्पष्ट किया कि इसे Meta द्वारा दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कंटेंट ब्लॉकिंग को ऑटोमेट करने से जोड़ना सही नहीं है।
Meta के साथ API इंटीग्रेशन 2025 में हुआ था
PIB Fact Check ने बताया कि Meta के साथ API इंटीग्रेशन 2025 में Meta के अनुरोध पर किया गया था। यानी यह इंटीग्रेशन फरवरी 2026 में तीन घंटे की नई टेकडाउन समयसीमा लागू होने के बाद शुरू नहीं हुआ था। सरकार के मुताबिक, भारत में करीब 60 करोड़ सोशल मीडिया यूजर्स हैं और बड़ी संख्या में कंटेंट लगातार पोस्ट किया जाता है। ऐसे में हर कंटेंट की निगरानी और गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ समय पर कार्रवाई के लिए तकनीकी व्यवस्था का इस्तेमाल जरूरी है।
मार्च से जुलाई 2026 तक करीब 2.98 लाख URL भेजे गए
PIB Fact Check के अनुसार, मार्च 2026 से जुलाई 2026 के बीच लगभग 2.98 लाख URL टेकडाउन के लिए भेजे गए। इनमें से करीब 2.44 लाख URL यानी लगभग 82 प्रतिशत राज्यों की ओर से भेजे गए थे। वहीं, करीब 51 हजार URL Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की ओर से भेजे गए। इनमें साइबर अपराध, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अपराध और स्टॉक-इन्वेस्टमेंट स्कैम से संबंधित कंटेंट शामिल था।
वित्तीय धोखाधड़ी और बाल यौन शोषण से जुड़े कंटेंट पर ज्यादा कार्रवाई
सरकार ने बताया कि पिछले दो वर्षों में I4C की ओर से गैरकानूनी कंटेंट के संबंध में भेजी गई ज्यादातर सूचनाएं ट्रांसनेशनल वित्तीय धोखाधड़ी, CSAM यानी Child Sexual Abuse Material और महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े अपराधों से संबंधित थीं।
इससे पता चलता है कि टेकडाउन प्रक्रिया का इस्तेमाल सिर्फ किसी खास विरोध प्रदर्शन या राजनीतिक गतिविधि से जुड़े कंटेंट के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि साइबर अपराध और गंभीर गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े कंटेंट के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
Sahyog Portal के जरिए भेजी जाती है सूचना
PIB Fact Check ने यह भी स्पष्ट किया कि IT इंटरमीडियरीज अपनी तरफ से किसी भी कंटेंट को हटाने का फैसला नहीं करते। वे सक्षम अधिकारियों की ओर से भेजी गई सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हैं। संबंधित मंत्रालय या राज्य सरकार की ओर से अधिसूचित केवल अधिकृत अधिकारी ही Sahyog Portal के माध्यम से गैरकानूनी कंटेंट हटाने के लिए सूचना भेज सकते हैं।
Sahyog Portal राज्यों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों को IT Intermediaries तक गैरकानूनी कंटेंट से जुड़ी जानकारी पहुंचाने की सुविधा देता है। PIB के अनुसार, भेजी गई सभी सूचनाओं की संबंधित सरकारों की ओर से समय-समय पर समीक्षा भी की जाती है।
