आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के साथ दुनिया भर में डेटा सेंटर की जरूरत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन डेटा सेंटर को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली, पानी और जमीन की जरूरत होती है। इसी चुनौती को देखते हुए चीन ने दुनिया का पहला व्यावसायिक अंडरवॉटर डेटा सेंटर शुरू कर दिया है, जो समुद्र के नीचे काम करता है और इसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में विंड पावर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
चीन ने शुरू किया दुनिया का पहला अंडरवॉटर डेटा सेंटर, समुद्र के नीचे चलेगा AI का इंफ्रास्ट्रक्चर/Photo-AI
शंघाई के पास समुद्र के नीचे बना डेटा सेंटर
चीन का यह प्रोजेक्ट शंघाई लिंगांग अंडरसी डेटासेंटर प्रदर्शन परियोजना (Shanghai Lingang Undersea Datacentre Demonstration Project) है। यह पूर्वी शंघाई के लिंगांग इलाके में स्थित है, जो एक हाईटेक फ्री-ट्रेड जोन है। यह डेटा सेंटर समुद्र की सतह से करीब 10 मीटर नीचे बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट को HiCloud टेक्नोलॉजी (Shanghai Hailanyun Technology) और सरकारी कंपनी चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन कंपनी ने मिलकर तैयार किया है। इसकी क्षमता 24 मेगावाट है। यह परियोजना अक्टूबर 2025 में पूरी हुई थी और इसके निर्माण में करीब 225 मिलियन डॉलर खर्च होने की बात कही गई थी।
जमीन पर बने डेटा सेंटर से कम बिजली और पानी की जरूरत
चीन का दावा है कि यह अंडरवॉटर डेटा सेंटर सामान्य जमीन पर बने डेटा सेंटर की तुलना में करीब 22 प्रतिशत कम बिजली खर्च करता है। इसकी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन एनर्जी से पूरा किया जाता है, जिसमें पास मौजूद ऑफशोर विंड फार्म की मदद ली जा रही है। डेटा सेंटर की सबसे बड़ी समस्या कूलिंग की होती है। सर्वर लगातार काम करते समय काफी गर्म हो जाते हैं, जिन्हें ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। चीन के अनुसार, समुद्र के अंदर बने इस डेटा सेंटर को प्राकृतिक रूप से पानी से ठंडक मिलती है, जिससे यह जमीन पर बने डेटा सेंटर के मुकाबले 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी बचाता है।
AI के दौर में डेटा सेंटर की बढ़ती जरूरत
AI मॉडल को ट्रेन करने और चलाने के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है। इसी वजह से दुनिया भर में बड़े डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं, हालांकि इनके ऊर्जा और पानी इस्तेमाल को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर का वॉटर फुटप्रिंट काफी बढ़ सकता है। यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर वाटर, एनवायरमेंट एंड हेल्थ के अनुसार, 2030 तक डेटा सेंटर की पानी की जरूरत बहुत बड़े स्तर तक पहुंच सकती है।
पर्यावरण को लेकर भी उठे सवाल
अंडरवॉटर डेटा सेंटर को लेकर पर्यावरण संबंधी सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के अंदर ऐसी सुविधाओं से समुद्री तलछट में बदलाव और समुद्री पानी के स्थानीय तापमान में वृद्धि जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, हालांकि चीन का कहना है कि यह तकनीक ऊर्जा और संसाधनों की बचत के लिए एक नया रास्ता खोल सकती है।
चीन ने पश्चिमी देशों से मारी बाजी
चीन पहला देश नहीं है जिसने समुद्र के अंदर डेटा सेंटर का परीक्षण किया है। Microsoft ने 2018 में स्कॉटलैंड के ऑर्कनी द्वीप के पास एक अंडरवॉटर डेटा सेंटर प्रोजेक्ट शुरू किया था और इसके शुरुआती नतीजे सकारात्मक रहे थे, लेकिन चीन पहला देश बन गया है जिसने इस तरह की सुविधा को व्यावसायिक रूप से शुरू किया है।
