कमाल, हम सब अपने गुजरे कल को देख सकते हैं, भारतीय वैज्ञानिकों ने की बड़ी खोज

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Feb 4, 2023, 08:45 AM IST

हम सब यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि लाखों करोड़ साल पहले ब्रह्मांड कैसा था। हाल ही में पुणे एनसीआरए के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण खोज की है जिसके जरिए हम अपने बीते कल को देख सकते हैं।

हम सबके जेहन में यह सवाल निश्चित तौर पर आता है कि चांद, तारे, सितारे, ब्रह्मांड का रहस्य क्या है। तारों की दुनिया, हम सबकी दुनिया की उत्पत्ति का स्रोत क्या है। कुल मिलाजुला कर जीवन का रहस्य जानने की उत्सुकता रहती है। पुणे की नेशनल सेंटर फॉर रेडियोफिजिक्स केंद्र के निदेशक यशवंत गुप्ता का कहना है कि हमने एक ऐसी खोज की है जिसके जरिए करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर स्थित गैलेक्सी से हाइड्रोजन गैस के उत्सर्जन में रेडियो सिग्नल को खोजा है। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लाखों-करोड़ों साल पहले ब्रह्मांड में मौजूद गैलेक्सी को देख सकते हैं। इसके जरिए हम अपने गुजरे समय को भी देखने में कामयाब होंगे। यही नहीं इसकी मदद से हमें यूनिवर्स के इतिहास की पुनर्निमाण में मदद मिलेगी।

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एनसीआरए पुणे के वैज्ञानिकों ने की खोज

खास खोज के जरिए खास जानकारी

जिस खगोलीय दूरी पर सिग्नल मिला वह अब तक का सबसे दूर है। यह एक आकाशगंगा से 21 सेमी उत्सर्जन के मजबूत लेंसिंग की पहली पुष्टि की गई। ये सभी निष्कर्ष रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी के मासिक नोटिस में प्रकाशित भी किए गए हैं। जीएमआरटी डेटा का उपयोग करते हुए, अर्नब चक्रवर्ती, मैकगिल विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग और ट्रॉटियर स्पेस इंस्टीट्यूट के एक पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता और आईआईएससी के भौतिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, निरुपम रॉय ने रेडशिफ्ट z = 1.29 पर आकाशगंगा में परमाणु हाइड्रोजन से एक रेडियो सिग्नल का पता लगाया है। चक्रवर्ती ने कहा कि आकाशगंगा से अत्यधिक दूरी के कारण 21 सेमी उत्सर्जन रेखा उस समय तक 48 सेमी तक पहुंच गई थी जब सिग्नल स्रोत से दूरबीन तक पहुंचा था।

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