भारत मौसम विज्ञान विभाग एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के लिए एक बेहद आधुनिक AI आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली लॉन्च की है, जो अब हर 1 किलोमीटर क्षेत्र के लिए 10 दिन पहले तक बारिश का अनुमान दे सकेगी। यह सिस्टम मौजूदा जिला-स्तरीय पूर्वानुमानों की तुलना में कहीं अधिक सटीक और हाइपर-लोकल जानकारी उपलब्ध कराएगा।
आपके मोहल्ले में कब होगी बारिश, 1KM एरिया के लिए 10 दिन पहले बताएगा AI
कैसे काम करेगा नया AI मौसम सिस्टम?
‘High Spatial Resolution Rainfall Forecast for Uttar Pradesh’ नाम का यह सिस्टम भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र और IMD द्वारा मिलकर विकसित किया गया है। यह तकनीक पहले 12.5 किलोमीटर रिजॉल्यूशन वाले मौसम मॉडल से डेटा लेती है, फिर AI आधारित डाउनस्केलिंग के जरिए उसे 4 किलोमीटर और अंत में 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन तक बदल देती है। यानी अब शहर ही नहीं, बल्कि आपके आसपास के इलाके तक के मौसम का अनुमान लगाया जा सकेगा।
किसानों और शहरों को होगा बड़ा फायदा
सरकार के अनुसार यह सिस्टम कृषि, जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, शहरी योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। किसान अब बुवाई का सही समय तय कर सकेंगे, सिंचाई और फसल सुरक्षा की बेहतर योजना बना पाएंगे, भारी बारिश से पहले पशुओं और संसाधनों को सुरक्षित स्थान पर ले जा सकेंगे। नोएडा के गुलाब उत्पादक रामअवतार त्यागी का कहना है कि पिछले मानसून में बाढ़ से उनकी फसल को भारी नुकसान हुआ था। उनके मुताबिक, “अगर पहले से सटीक जानकारी मिल जाए तो नुकसान काफी कम किया जा सकता है।”
लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में जलभराव और फ्लड मैनेजमेंट के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इसकी मदद से स्थानीय प्रशासन पहले से जलभराव वाले इलाकों की पहचान कर सकेगा, राहत और बचाव की तैयारी समय रहते कर पाएगा, सड़क निर्माण और अन्य कार्य बारिश के हिसाब से प्लान कर सकेगा।
रियल टाइम डेटा से होगा अपडेट
यह सिस्टम ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS), ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG), डॉप्लर रडार और सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल करेगा। मौसम विभाग के अनुसार, पहले इसे रियल टाइम डेटा से कैलिब्रेट किया जाएगा और बाद में दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
मोबाइल ऐप पर भी मिलेगी जानकारी
मौसम पूर्वानुमान भारत मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र की वेबसाइट और मोबाइल ऐप्स के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा। यह नई तकनीक खासतौर पर मानसून और बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है, क्योंकि अब “जिले” नहीं बल्कि “मोहल्ले” के हिसाब से बारिश की भविष्यवाणी संभव होगी।
