AI अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या कोड लिखने तक सीमित नहीं है। यह मेडिकल रिसर्च में भी नई संभावनाएं खोल रहा है। इसका ताजा उदाहरण Cody Tranbarger हैं, जिन्होंने Anthropic के AI मॉडल Claude की मदद से एक छोटी बायोटेक कंपनी खड़ी की और मांसपेशियों की एक दुर्लभ बीमारी के संभावित इलाज पर काम किया। अब AI मॉडल Claude बनाने वाली कंपनी Anthropic ने उनके स्टार्टअप Mithril Medicine का अधिग्रहण कर लिया है।
क्या AI बदल सकता है दवा बनाने का तरीका?
एक इंसान और AI के सहारे चल रही थी पूरी कंपनी
Cody Tranbarger ने करीब 18 महीने पहले Mithril Medicine की शुरुआत की थी। इस कंपनी की खास बात यह थी कि यहां वह अकेले पूर्णकालिक कर्मचारी थे, जबकि रिसर्च और रोजमर्रा के कई कामों में Claude AI की मदद ली जाती थी। बाहरी लैब में होने वाले प्रयोगों से लेकर डेटा संभालने, कॉन्ट्रैक्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे कामों में भी AI की भूमिका थी। कंपनी कुछ कामों के लिए पेड कंसल्टेंट्स की मदद भी लेती थी।
Tranbarger ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Prof_Oak_ नाम से अपनी कंपनी के अधिग्रहण की जानकारी दी। यह नाम मशहूर एनिमेटेड सीरीज Pokémon के प्रोफेसर सैमुअल ओक से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि Anthropic ने जुलाई में ही उनकी कंपनी खरीद ली थी। Anthropic ने इस मॉडल को “Pipeline-in-a-Person” नाम दिया है, यानी ऐसा रिसर्च मॉडल जिसमें एक व्यक्ति AI की मदद से कई भूमिकाएं संभाल सकता है।
चूहों पर परीक्षण में मिले शुरुआती नतीजे
Mithril Medicine का एक प्रमुख प्रोजेक्ट LAMA2 से जुड़ी मांसपेशियों की बीमारी के संभावित इलाज पर केंद्रित था। इस तरह की बीमारी मांसपेशियों की कमजोरी और काम करने की क्षमता पर असर डाल सकती है। Anthropic के मुताबिक, कंपनी ने 18 महीने से भी कम समय में इस प्रोजेक्ट में चूहों पर शुरुआती प्रमाण हासिल किए।
रिपोर्ट के अनुसार, एक खास एंटीबॉडी फॉर्मेट पाने वाले सात चूहों में पकड़ की ताकत और ट्राइसेप्स मांसपेशियों की अधिकतम ताकत, नियंत्रण समूह के चार चूहों की तुलना में लगभग दोगुनी दर्ज की गई। कंपनी का कहना है कि इस तरीके से संभावित इलाज के विचार को शुरुआती प्रयोगों में उत्साहजनक नतीजों तक पहुंचाने में मदद मिली।
हालांकि, इन नतीजों को इंसानों में इलाज की सफलता नहीं माना जा सकता। तकनीकी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रयोगों में कुछ सीमाएं थीं। परीक्षण पूरी तरह रैंडमाइज्ड नहीं था, अलग-अलग समय पर किए गए प्रयोगों में अंतर था और चूहों के समूह को भी अलग-अलग प्रयोगों के बीच स्थानांतरित किया गया। रिपोर्ट की अभी विशेषज्ञों से समीक्षा यानी पीयर रिव्यू भी बाकी है।
अब इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी?
Tranbarger का मानना है कि Anthropic के साथ जुड़ने से उन्हें अपने रिसर्च प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा संसाधन मिलेंगे। Anthropic ने भी उम्मीद जताई है कि अगर दवा के संभावित उम्मीदवार आगे के परीक्षणों में सफल रहते हैं, तो 2028 के आखिरी महीनों तक इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की तैयारी हो सकती है। यह फिलहाल कंपनी का अनुमान है, कोई तय समयसीमा या इलाज की मंजूरी नहीं।
Anthropic पहले से ही AI के जरिए दवाओं की खोज और विकास की प्रक्रिया तेज करने पर काम कर रही है। कंपनी की गतिविधियों में जीन एडिटिंग, नई दवाओं के अणुओं की डिजाइनिंग, दवा निर्माण और क्लिनिकल ट्रायल की योजना जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
क्या AI बदल सकता है दवा बनाने का तरीका?
नई दवाओं को विकसित करने में आमतौर पर लंबा समय, बड़ी टीम और काफी पैसा लगता है। Mithril Medicine का मॉडल दिखाता है कि AI रिसर्च के कई चरणों को व्यवस्थित करने और छोटे दलों की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि, प्रयोगों की गुणवत्ता, स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा, सुरक्षा जांच और इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल अब भी जरूरी हैं।
