70 मिनट की स्पीच नहीं, डच कोच मारिन ने कैसे एक साल में बदल दी भारतीय महिला हॉकी टीम की सूरत

करीब एक साल पहले यानी 2 जनवरी 2026 को जब मारिन को कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी तो विमेंस टीम संघर्ष के दौर से गुजर रही थी। नजरें 2028, लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक पर है, जिसका टिकट गोल्ड जीतते ही सलीमा टेटे की टीम ने कटा लिया।

चीन को 1-0 से हराकर जैसे ही भारतीय विमेंस टीम ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में गोल्ड जीता, पूरा देश खुशी से झूम उठा। लेकिन इससे पहले भारतीय बेटियों ने उस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस जीत का श्रेय कोच शोर्ड मारिन को दिया। भारतीय टीम ने उन्हें हवा में उछालते हुए इस जीत की खुशी मनाई। मारिन ने इस वीडियो को अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा 'इससे ज्यादा क्या कहें। करीब एक साल पहले यानी 2 जनवरी 2026 को जब मारिन को कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी तो विमेंस टीम संघर्ष के दौर से गुजर रही थी।

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शोर्ड मारिन (साभार-PTI)

एक साल के भीतर टीम ने सफलता की अलग दास्तान लिखी और कोच का मानना है कि ये अभी शुरुआत है। नजरें 2028, लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक पर है, जिसका टिकट गोल्ड जीतते ही सलीमा टेटे की टीम ने कटा लिया। लेकिन सवाल है कि कैसे आलोचकों के निशाने पर रहते हुए मारिन ने सफलता की इबारत लिख दी। मैच के बाद हॉकी टीम ने कोच मारिन के साथ जमकर जश्न मनाया। पहले टीम ने ड्रेसिंग रूम में चैंपियन-चैंपियन गाने पर डांस किया तो बाद में टीम बस में कोच को भी इसमें शामिल कर लिया। इस जश्न के वह हकदार भी थे। एक बिखरे हुए और बंटे हुए चोटिल ड्रेसिंग रूम को निर्भीक और चैम्पियन टीम में बदलने का श्रेय आखिर उन्हें और उनके सहयोगी स्टाफ को जाता है।

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