नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र से 134वें डुरंड कप की ट्रॉफियों का फ्लैग-ऑफ किया, जो एशिया का सबसे पुराना और भारत का सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट है। यह आयोजन भारतीय सेना द्वारा हर साल किया जाता है, और इस बार यह टूर्नामेंट मणिपुर में पहली बार आयोजित किया जा रहा है।
134वें डुरंड कप की ट्रॉफियों का फ्लैग-ऑफ
इस साल डुरंड कप की शुरुआत के साथ ही मणिपुर को भी पहली बार होस्टिंग का अवसर मिला है। यह आयोजन उस राज्य में हो रहा है, जो हाल ही में सामाजिक अस्थिरता और तनाव से गुजर रहा है, ऐसे में यह टूर्नामेंट समाज को जोड़ने और शांति को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अलावा, इस मौके पर CDS जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी, वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह और ईस्टर्न कमांड प्रमुख ले. जनरल आरसी तिवारी भी उपस्थित रहे। अर्जुन पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध फुटबॉलर संदेश झिंगन ने भी समारोह में हिस्सा लिया और डुरंड कप के इतिहास पर प्रकाश डाला।
डुरंड कप 2025 के मुख्य बिंदु:
- आयोजन की तारीखें: 22 जुलाई से 23 अगस्त 2025 तक।
- होस्टिंग राज्य: पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, मेघालय और मणिपुर।
- टीमें: इस टूर्नामेंट में 24 टीमें भाग लेंगी, जिसमें भारतीय सुपर लीग (ISL), I-League और सशस्त्र बलों की टीमें शामिल हैं।
- फाइनल: 23 अगस्त 2025 को कोलकाता में होगा।
डुरंड कप की ऐतिहासिक विरासत
- स्थापना: 1888 में शिमला में हुआ था पहला डुरंड कप।
- टूर्नामेंट के 137 सालों का इतिहास: यह टूर्नामेंट न केवल फुटबॉल की एक प्रतिष्ठित प्रतियोगिता है, बल्कि यह भारत में युवाओं को अनुशासन, टीमवर्क और प्रतियोगिता के महत्व को सिखाने का एक बड़ा मंच भी है।
- 2019 से पूर्वोत्तर भारत में: इस साल, डुरंड कप को पांच राज्यों में खेला जा रहा है, जिसमें मणिपुर का भी नाम जुड़ा है।
मणिपुर में इस टूर्नामेंट का आयोजन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य लंबे समय से सामाजिक अस्थिरता और विभाजन का सामना कर रहा है। डुरंड कप के आयोजन से समाज में एकता और सामूहिक विश्वास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खेल के जरिए युवाओं को एक सकारात्मक दिशा मिल सकती है और वे अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित कर सकते हैं।
134वें डुरंड कप का यह संस्करण न केवल फुटबॉल के माध्यम से खेल की भावना को आगे बढ़ाएगा, बल्कि यह एक सामाजिक और सामूहिक एकता का प्रतीक भी बनेगा। यह मणिपुर जैसे राज्य के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक हो सकता है, जहां युवा अपनी पूरी क्षमता से उभर सकते हैं।
