ASIAD, EXCLUSIVE: भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों ने दबाव में शानदार संयम दिखाते हुए एशियाई खेलों की टीम स्पर्धाओं में स्वर्णिम क्लीन स्वीप किया जब बुधवार को यहां देश की पुरुष, महिला और मिश्रित टीम ने अपने-अपने खिताब बरकरार रखते हुए स्वर्ण पदक की हैट्रिक लगाई। इस शानदार प्रदर्शन में चिकिता तनीपार्थी और साहिल जाधव की मिश्रित जोड़ी का स्वर्ण पदक जीतना खास रहा क्योंकि इसके साथ भारत ने ओलंपिक कोटा स्थान भी हासिल किया। भारत इस तरह 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के कंपाउंड मिश्रित टीम वर्ग के लिए क्वालीफाई करने वाला पहला देश बन गया।
कुशल दलाल से स्पोर्ट्स नाउ की खास बातचीत (SPORTS NOW)
तीरंदाजी में तीन गोल्ड के अभियान का अंत कुशल दलाल, साहिल जाधव और गणेश मणिरत्नम थिरुमुरु की पुरुष टीम ने किया। भारतीय पुरुष टीम फाइनल में दो अंक से पीछे थी लेकिन उसने अंतिम चरण में शानदार वापसी करते हुए चीन को 238-237 से हराकर रोमांचक जीत दर्ज की। चीन की टीम में जियाहाओ लियाओ, जिनयी लियू और जिंग्यू शी शामिल थे। चीन को रजत पदक मिला।
'स्पोर्ट्स नाउ' ने भारतीय पुरुष आर्चरी टीम के गोल्ड मेडलिस्ट तीरंदाज कुशल दलाल से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर बात की और इस स्वर्णिम सफलता को लेकर अपनी खुशी जताई। आइए जानते हैं उन्होंने सवालों के क्या जवाब दिए।
सवाल: पुरुष टीम कंपाउंड तीरंदाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता कुशल, सबसे पहले आपको बहुत-बहुत बधाई। हम अभी साहिल से भी बात कर रहे थे, आपसे भी वही सवाल पूछूंगी कि अपना राष्ट्रध्वज सबसे ऊपर जाते देखना, राष्ट्रगान बजना और यह महसूस करना कि हम भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते हैं। क्या आप उस भावना को शब्दों में व्यक्त कर सकते हैं?
कुशल: मुझे लगता है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण नहीं हो सकता कि उसके देश का झंडा सबसे ऊपर लहराए। एक एथलीट इतने सालों की कड़ी मेहनत केवल उसी एक पल के लिए करता है। आज हमने उस पल को जिया और देखा, जिससे पूरा शरीर ऊर्जा से भर गया। मुझे लगता है कि हमारी इस जीत से जो प्रेरणा मिलेगी, वह आने वाले अन्य सभी टूर्नामेंटों में हमारी मदद करेगी।
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सवाल: और टीम स्पर्धाओं में अक्सर यह होता है कि यदि किसी एक साथी से थोड़ी चूक हो जाए, तो दूसरा उसे संभाल लेता है। आज का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और बराबरी का था और अंत में हम केवल एक अंक से जीते हैं।
कुशल: जी बिल्कुल, मेरा मानना है कि कोई भी पूरी तरह से परिपूर्ण नहीं होता। हमारी टीम का सबसे बड़ा फायदा यह था कि हम तीनों एक-दूसरे को समझते थे और आपस में गहरा भरोसा करते थे। हम तीनों मिलकर एक-दूसरे को पूरा करते हैं। उस समय हमारे पास जो अवसर था, हम उसी में अपना 100% योगदान देने की कोशिश कर रहे थे, और आगे जो होगा वह देखा जाएगा।
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सवाल: कुशल, जब यह तय हो गया कि भारत ने स्वर्ण पदक जीत लिया है, तब आप सबसे अधिक उत्साहित और जोश में दिख रहे थे। इतना रोमांचक फाइनल मुकाबला होने के कारण यह जीत बहुत मायने रखती है।
कुशल: जी बिल्कुल, स्वर्ण पदक जीतना अपने आप में बहुत बड़ी बात है, क्योंकि हम कई दिनों से देख रहे थे कि भारत स्वर्ण पदक की दौड़ में थोड़ा पीछे रह रहा था।
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सवाल: पदक तो आ रहे थे, लेकिन रंग का अंतर था! कई लोग कह रहे थे कि 2023 के प्रदर्शन को हम दोहरा नहीं पा रहे हैं, लेकिन आज तीरंदाजी में महिला टीम, मिश्रित टीम और अब आपकी पुरुष टीम ने जो शुरुआत की है, उसने पूरे देश में फिर से उत्साह भर दिया है।
कुशल: जी, और मुझे लगता है कि हमें देखकर अन्य खिलाड़ियों को भी बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी, ताकि हम अधिक से अधिक स्वर्ण पदक हासिल कर सकें।
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सवाल: कुशल, आप इस स्वर्ण पदक को किसे समर्पित करना चाहेंगे?
कुशल: मैं यह पदक अपने माता-पिता, अपने कोचों और उन सभी लोगों को समर्पित करता हूँ जिन्होंने मेरी इस यात्रा में मदद की। विशेष रूप से अपनी मां को, जो मुझे इस खेल में लेकर आईं और पहले दिन से मेरे साथ खड़ी रहीं।
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सवाल: भारत के जो नागरिक पूरे दल का समर्थन कर रहे हैं और उम्मीदें लगाए बैठे हैं, उनके लिए आप क्या कहेंगे?
कुशल: उनसे यही कहूंगा कि अभी तीन दिन और बाकी हैं, इसलिए भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते रहें। हमारे अन्य तीरंदाजों में भी बहुत क्षमता है और वे भी वैसा ही शानदार प्रदर्शन करके दिखाएंगे।
