इंग्लैंड के महान फुटबॉल खिलाड़ी और राष्ट्रीय टीम के पूर्व कप्तान और कोच केविन कीगन का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। दो बार के ’बैलन डी’ओर’’ विजेता कीगन कैंसर से जूझ रहे थे। पिछले महीने ही उन्होंने अपनी बीमारी की जानकारी सार्वजनिक की थी। कीगन के निधन की जानकारी उनके पूर्व क्लब न्यूकैसल यूनाइटेड ने सोमवार को दी। क्लब ने उन्हें अपने इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित, प्रभावशाली और सर्वाधिक प्रिय हस्तियों में से एक बताया।
केविल कीगन (साभार-X)
कीगन 1970 के दशक में कीगन सिर्फ इंग्लैंड ही नहीं बल्कि यूरोपीय फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में शुमार थे। वह इंग्लैंड के उन चार खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने प्रतिष्ठित बैलन डी’ओर पुरस्कार जीता। अपनी फुर्ती, गोल करने की क्षमता और अथक मेहनत के दम पर उन्होंने विश्व फुटबॉल में अलग पहचान बनाई।
कीगन उन शुरुआती अंग्रेज खिलाड़ियों में भी शामिल थे जिन्होंने घरेलू फुटबॉल छोड़कर यूरोप की किसी बड़ी लीग में खेलने का फैसला किया। 1977 में लिवरपूल के साथ यूरोपीय कप जीतने के बाद वह जर्मनी के क्लब हैम्बर्ग एसवी से जुड़े।
दो बार जीता बैलन डी’ओर अवॉर्ड
हैम्बर्ग में उन्होंने 1978 और 1979 में लगातार दो बार बैलन डी’ओर जीता। 1979 में क्लब को जर्मन लीग (बुंडेसलीगा) का खिताब दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। हैम्बर्ग ने उन्हें क्लब के इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में से एक बताया। इंग्लैंड के लिए कीगन ने 63 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 21 गोल किए और 1982 विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व किया।
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कोच के रुप में रखें जाएंगे याद
उन्होंने कोच के रूप में भी अमिट छाप छोड़ी। 1992 से 2008 तक चले अपने कोचिंग करियर में कीगन ने न्यूकैसल यूनाइटेड को 1995-96 प्रीमियर लीग खिताब के बेहद करीब पहुंचाया। उन्होंने 1999 से 2000 तक इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी भी संभाली। हालांकि यूरो 2000 में टीम पहले दौर से बाहर हो गई और 2002 विश्व कप क्वालीफायर में जर्मनी से हार के बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।
