ग्लास्गो: भारत की स्टार बॉक्सर और ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 75 किलो भारवर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम करने में नाकाम रहीं। उन्हें ऑस्ट्रेलिया की एमा सु ग्रीनट्री के खिलाफ फाइनल मुकाबले में हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका पहला पदक है। यह भारत का मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में बॉक्सिंग में मिला दूसरा सिल्वर मेडल और कुल सातवां पदक है। इससे पहले भारत पांच गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुका है। लवलीना से जादुमणि सिंह भी गोल्ड मेडल जीतने में नाकाम रहे थे।
लवलीना बोरगोहेन (फोटो क्रेडिट AI Generated)
कांटे की टक्कर में मिली लवलीना को हार
दुनिया की नंबर चार बॉक्सर एमा सु ग्रीनट्री और सातवें नंबर की मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के बीच पहले राउंड में ही कांटे की टक्कर देखने को मिली। पहले राउंड में लवलीना 1-4 से पिछड़ गईं। केवल एक जज ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद दूसरे राउंड में लवलीना ने शानदार वापसी करते हुए 4-1 के अंतर से बराबरी कर ली। ऐसे में मुकाबला तीसरे और आखिरी राउंड में पहुंचा जहां दोनों के बीच शानदार भिड़ंत हुई और अंत में बाजी 4-1 से ऑस्ट्रेलियाई बॉक्सर ने मारी और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। अंतिम स्कोर 29-28, 30-27, 27-30, 29-28, 29-28 रहा। मामूली अंतर से लवलीना स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं।
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35 हुई भारत के पदकों की संख्या, चौथे पायदान पर पहुंचा
अरुंधति चौधरी के गोल्ड मेडल के साथ ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारत की झोली में 11 गोल्ड, 16 सिल्वर और 8 कांस्य पदक आ चुके हैं। बॉक्सिंग रिंग में भारत के खाते में 5 गोल्ड और दो सिल्वर सहित कुल 7 मेडल आ गए हैं। तीन गोल्ड मेडल मुकाबले अभी बाकी हैं। पदक तालिका में भारत चौथे पायदान पर पहुंच गया है। भारत अब पदकों के मामले में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा से पीछे है।
