ग्लास्गो: भारत के 22 वर्षाय मुक्केबाज जादुमणि सिंह ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल में भारत के लिए पुरुषों के 55 किग्रा भारवर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम करने में नाकाम रहे। यह भारत का ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में बॉक्सिंग में तीसरा पदक है। कड़े मुकाबले में जादुमणि गोल्ड मेडल जीतने में नाकाम रहे। जादुमणि ने फाइनल के पहले राउंड में 3-2 के अंतर से जीत दर्ज करने में सफल रहे। इसके बाद दूसरे राउंड में ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी डिक्सन ने शानदार वापसी की और 5-0 से दूसरे राउंड में जीत दर्ज करने में सफल रहे। इसके बाद करो या मरो वाले तीसरे राउंड में जादुमणि का जादू नहीं चला और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। फाइनल के सफर तक एक भी राउंड नहीं गंवाने वाले मणिपुर के मुक्केबाज को अप्रत्याशित तरीके से 0-5 के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा।
जादूमणि सिंह (फोटो क्रेडिट AI Generated)
28 हुई भारत के पदकों की संख्या, छठे पायदान पर बरकरार
जादुमणि के सिल्वर मेडल के साथ ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पदकों की संख्या 28 हो गई है। भारत के खाते में 7 गोल्ड, 14 रजत और 7 कांस्य पदक के साथ छठे पायदान पर पहुंच गया है। बॉक्सिंग रिंग में 7 गोल्ड मेडल का इंतजार भारत कर रहा है। एक-एक गोल्ड भारत की पदक तालिका में स्थिति और मजबूत करता जाएगा।
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टूटा बॉक्सिंग में 10 गोल्ड जीतने का सपना
प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया के गोल्ड और जादूमणि सिंह के सिल्वर मेडल के बाद भारत के सात और मुक्केबाज अंकुश पंघल(पुरुष 80 किग्रा), अरुंधति चौधरी (विमेंस 70 किग्रा), साक्षी चौधरी( विमेंस 51 किग्रा), प्रिया घंघास(विमेंस 60 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (विमेंस 75 किग्रा), सचिन सिवाच(पुरुष 60 किग्रा), नरेंदर बेरवाल(90 किग्रा) गोल्ड मेडल जीतने के दावेदार हैं। जादुमणि का फाइनल में हार के साथ भारत का बॉक्सिंग में 10 गोल्ड मेडल जीतने का सपना टूट गया।
