न्यूलैंड्स: आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2023 के रविवार को खेले जाने वाले खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की टीमें भिड़ेंगी। उस मुकाबले के दौरान दुनियाभर के क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें एक ऐसी खिलाड़ी पर होंगी जिसका ओलंपिक गोल्ड जीतने का सपना टूट गया। लेकिन अब क्रिकेट के मैदान पर दक्षिण अफ्रीका को विश्व चैंपियन बनाकर उनके पास इतिहास रचने का शानदार मौका है। पांच बार की टी20 विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को खिताबी मुकाबले में पटखनी देना प्रोटियाज विमेंस के लिए आसान नहीं होगा।
तैजमिन ब्रिट्स(साभार Instagram Tazmin-Brits)
16 साल की उम्र में बनीं थी जूनियर वर्ल्ड चैंपियन
एक वक्त था जब तैजमिन ब्रिट्स(Tazmin Brits) का सपना ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना रहा होगा। उनके इस सपने को पर साल 2007 में महज 16 साल की उम्र में भालाफेंक की जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद लगे थे। उन्होंने अपने दाहिने हाथ पर ओलंपिक रिग्स का टैटू भी बनवाया था जो कि आज भी नजर आता है। लंदन में साल 2012 में हुए ओलंपिक खेलों में गोल्ड जीतने पर उनकी नजर थी। साल 2011 में उन्होंने उसके लिए जरूरी क्वालीफिकेशन भी हासिल कर ली थी।
सड़क दुर्घटना ने तोड़ा ओलंपिक ड्रीम
साल 2011 में हुई एक सड़क दुर्घटना ने तैजमिन ब्रिट्स का ओलंपिक गोल्ड का सपना हमेशा के लिए तोड़ दिया। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने के बाद वो कई महीने अस्पताल में भर्ती रहीं। उन्हें फिर से अपने पैरों पर चलना सीखना पड़ा। उन्हें यह भी बताया गया कि उनका जैवलिन थ्रो में करियर अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है।
लोगों से मेलजोल के लिए हुई क्रिकेट की शुरुआत
निराशा के इस दौर से गुजरते हुए ब्रिट्स को आशा की एक किरण क्रिकेट के मैदान में नजर आई। उन्होंने क्रिकेट खेलने की शुरुआत लोगों के साथ मेलजोल बढ़ाने के इरादे से की थी। लेकिन धीरे-धीरे जब इस खेल में उनकी रुचि बढ़ती गई तो वो इसे गंभीरता से लेने लगी। उनके शानदार खेल की झलक घरेलू क्रिकेट में दिखाई देने लगी। अपने इरादों को नए पंख देने के लिए उन्होंने पोचेफ्स्ट्रॉम में वेट्रेस की नौकरी भी की।
27 की उम्र में हुई अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत
देरी से क्रिकेट को करियर के रूप में अपनाने वाली तैजमिन ब्रिट्स ने साल 2018 में 27 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय टीम के लिए डेब्यू किया। शुरुआती वर्ष में उन्होंने कुल 15 मैच खेले। लेकिन साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी में खेले गए विश्व कप के लिए द. अफ्रीकी टीम में उन्हें जगह नहीं मिल सकी। टीम के टॉप ऑर्डर में उस वक्त लीजली ली, डैन वैन निक्रेक और मिगन डी प्रीज के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी।
साल 2021 में किया वनडे डेब्यू
उस निराशा से उबरते हुए उन्होंने साल 2021 की शुरुआत में वनडे डेब्यू किया और 2022 में न्यूजीलैंड में वनडे विश्व कप का आयोजन हुआ तब वो 15 सदस्यीय टीम में जगह हासिल करने में सफल हुईं। उन्होंने पांच मैच खेले लेकिन अंतिम 11 में जगह बरकरार नहीं रख पाईं।
अहम खिलाड़ियों के संन्यास के बाद मिला मौका
पिछले 12 महीने में लीजली ली और मिगन डू प्रीज के संन्यास और डेन वैन निक्रेक की गैरमौजूदगी में टीम को ऊपरी क्रम में एक धाकड़ बल्लेबाज की जरूरत थी। ऐसे में ब्रिट्स ने इस मौके खाली नहीं जाने दिया और दोनों हाथों से उसे भुनाते हुए अपनी जगह टीम में पक्की कर ली।
सेमीफाइनल में सिर पर सजा जीत का सेहरा
टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन अबतक बेहद शानदार रहा है। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका की जीत की सेहरा ब्रिट्ज के सिर पर बंधा है। ब्रिट्ज ने उस अहम मुकाबले में 68 रन बनाने के साथ उन्होंने चार कैच भी लिए। विश्व कप में श्रीलंका के खिलाफ धीमी शुरुआत के बाद वो अब टूर्नामेंट में 5 पारियों में 176 रन के साथ दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं।
