नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका, जिंबाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में आईसीसी वर्ल्ड कप 2027 का आयोजन होने जा रहा है। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका के धाकड़ तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा का मानना है कि टूर्नामेंट में बतौर मेजबान खेलने से प्रोटियाज पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। रबाडा ने इसे दक्षिण अफ्रीका के लिए पहली बार 50 ओवर का वर्ल्ड कप जीतने का शानदार मौका बताया है। दक्षिण अफ्रीकी टीम ने हाल के वर्षों में आईसीसी टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन उसकी खिताबी झोली 21वीं सदी में खाली है।
कगिसो रबाडा (फोटो क्रेडिट ANI)
सीमित ओवरों की क्रिकेट में अबतक नहीं बन पाई है वर्ल्ड चैंपियन
साल 1992 में पहली बार वर्ल्ड कप में शिरकत करने के बाद दक्षिण अफ्रीका की टीम सीमित ओवरों की क्रिकेट में केवल एक आईसीसी खिताब अपने नाम कर सकी है। साल 1998 में दक्षिण अफ्रीकी टीम आईसीसी नॉकऑउट ट्रॉफी(अब चैंपियंस ट्रॉफी) जीतने में सफल हुई थी। उसके बाद वो कई बार खिताब के करीब पहुंची लेकिन ट्रॉफी अपने नाम नहीं कर सकी। 2024 में हालांकि पिछले साल दक्षिण अफ्रीकी टीम आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन बनने में सफल रही थी।अब उसकी नजर 24 साल लंबे अंतराल के बाद दूसरी बार वनडे विश्व कप की मेजबानी करते हुए खिताबी जीत पर है।
हम बचाने में सफल होंगे अपना किला
जोहान्सबर्ग में क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 के वेन्यू और ब्रांड की घोषणा के आधिकारिक कार्यक्रम में रबाडा ने ICC से कहा,'मुझे लगता है कि मेज़बानी करने के कारण अभी हमारे लिए इसमें और भी बहुत कुछ है। यह एक तरह से आजादी जैसा भी है। मुझे घर पर खेलने और इसे जीतने की जरूरत महसूस करने का कोई दबाव नहीं लगता। यह लगभग ऐसा है जैसे हम घर पर हैं और हम इस किले की रक्षा करने जा रहे हैं। और मेरे लिए इसका यही मतलब है। यह टीम का प्रतिनिधित्व करने के बारे में है।'
वसीम अकरम के स्पेल से ले रहे हैं प्रेरणा
रबाडा दक्षिण अफ्रीका के 2019 और 2023 में दक्षिण अफ्रीका के लिए वनडे वर्ल्ड कप में शिरकत कर चुके हैं। रबाडा वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे यादगार पलों से प्रेरणा भी ले रहे हैं। रबाडा ने साल 1992 के विश्व कप फाइनल में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ फेंके गए वसीम अकरम के मैच जिताऊ स्पेल को याद किया। बांए हाथ के पूर्व दिग्गज ने मैच में निर्णायक स्पेल डालकर पाकिस्तान को अपना पहला वर्ल्ड कप खिताब दिलाने में मदद की थी। रबाडा ने कहा, 'वर्ल्ड कप का एक पल जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा, क्योंकि मैं एक गेंदबाज हूं, इसलिए गेंदबाजों की करूंगा। वह था इंग्लैंड के खिलाफ़ फाइनल में वसीम अकरम का प्रदर्शन। उन्होंने जिस अंदाज में विरोधी खिलाड़ियों के स्टंप्स उखाड़े और अपने जुनून-हुनर के बल पर टीम को जीत दिलाई, वह कमाल का था। वह तेज गेंदबाज थे,उनमें बहुत हुनर था। उनके अंदर एक अलग ऊर्जा और मौजूदगी का एहसास होता था, जिससे पता चलता था कि वह खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।'
नॉकआउट का दबाव झेलना सीख गया है दक्षिण अफ्रीका
31 वर्षीय रबाडा का मानना है कि हालिया सफलताओं से दक्षिण अफ़्रीकी टीम का यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि वे बड़े नॉकआउट मैचों का दबाव झेल सकते हैं। उन्होंने कहा,'हमने दिखाया है कि हम फ़ाइनल और सेमीफाइनल में खेल सकते हैं। अब बस आखिरी कदम उठाने की बात है। इसलिए आत्मविश्वास तो है ही। भरोसा भी पक्का है, बस एक कदम और आगे बढ़ने की ज़रूरत है।' दक्षिण अफ़्रीका की टीम चार बार 50-ओवर वाले वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंची है, लेकिन अभी तक खिताब नहीं जीत पाई है। 2027 का विश्व कप उनके अपने देश में होने वाला है, इसलिए प्रोटियाज टीम उस आखिरी कदम को पूरा करके ट्रॉफी अपने नाम करने की कोशिश करेगी।
