Suryakumar Yadav: भारतीय टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा कि पिछले 15 महीनों में भारतीय टीम की लगातार सफलताओं के पीछे सबसे बड़ा कारण नॉकआउट मैचों में “असफलता के डर” पर काबू पाना और आक्रामक मानसिकता के साथ खेलना रहा है। उन्होंने माना कि टीम इंडिया ने अब सिर्फ परिणाम पर नहीं बल्कि अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर ध्यान देना सीख लिया है।
सूर्यकुमार यादव (फोटो- AP)
टीम इंडिया का सुनहरा दौर – डेढ़ साल में तीन बड़े खिताब
जून 2024 में टी20 विश्व कप जीतने के बाद से भारत ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। टीम ने वनडे प्रारूप में फरवरी 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती और फिर सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टी20 प्रारूप में एशिया कप 2025 अपने नाम किया।भारत ने 10 साल से अधिक समय तक कोई आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीता था, लेकिन अब उसने एक ही वर्ष में दो आईसीसी खिताब और एक एशिया कप जीतकर नया इतिहास रच दिया।
“असफलता का डर छोड़ा, नतीजे अपने आप आए” – सूर्यकुमार
सूर्यकुमार यादव ने ‘स्काईस्कैनर’ कार्यक्रम के दौरान कहा कि “मुझे लगता है कि पिछले डेढ़ साल में हमने क्रिकेट खेलने का नजरिया बदल दिया है। खासकर नॉकआउट मैचों में अब हम असफलता के डर के बारे में नहीं सोचते। हम बस मैदान पर उतरते हैं और वही करते हैं जो हमें सबसे अच्छा आता है — सकारात्मक और आक्रामक क्रिकेट खेलना।”उन्होंने आगे कहा कि “हमने यह तय किया कि परिणाम पर नहीं, बल्कि अपने प्रदर्शन पर ध्यान देंगे। जब आप बिना दबाव के खेलते हैं, तो नतीजे खुद-ब-खुद आपके पक्ष में आने लगते हैं।”
मानसिकता में बदलाव से बदला भाग्य
सूर्यकुमार ने स्वीकार किया कि टीम का मानसिक दृष्टिकोण ही अब उसकी सबसे बड़ी ताकत है।उन्होंने कहा कि “2022 में ऑस्ट्रेलिया में हुए टी20 विश्व कप के बाद हमने सोचा कि कुछ अलग करने की जरूरत है। हमने टीम के अंदर एक नई सोच और संस्कृति बनाई, जहां हर खिलाड़ी खुलकर खेल सके, गलती करने से न डरे।”इस बदलाव का नतीजा यह हुआ कि भारतीय टीम ने लगातार बड़े टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन किया और दबाव की परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखा।
रोहित शर्मा से सीखे कप्तानी के गुर
टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपने नेतृत्व कौशल का श्रेय रोहित शर्मा को दिया, जिनसे उन्होंने वर्षों तक सीख ली।उन्होंने कहा कि “रोहित भाई के साथ मेरा रिश्ता भाई जैसा है। जब मैंने 2010-11 में बॉम्बे (मुंबई) के लिए प्रथम श्रेणी पदार्पण किया था, तब वह पहले से ही घरेलू सर्किट में स्थापित थे। बाद में आईपीएल में मुंबई इंडियंस के साथ रहते हुए मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा।”
सूर्यकुमार ने आगे बताया कि “मैं कुछ समय के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स चला गया था, लेकिन जब 2018 में दोबारा मुंबई इंडियंस में लौटा तो वह टीम के कप्तान थे। तभी से मैंने मैदान पर और मैदान के बाहर नेतृत्व के सारे गुण उनसे सीखे — कैसे टीम को संभालना है, कैसे हर खिलाड़ी को प्रेरित करना है।”
भारत का नया अंदाज – “डर नहीं, दबदबा”
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टी20 टीम ने आक्रामक क्रिकेट को नई परिभाषा दी है। टीम अब निडर होकर बल्लेबाजी करती है, प्रयोग करने से नहीं डरती और विपक्ष पर दबाव बनाने का हर मौका भुनाती है। उन्होंने कहा कि- 'टीम के अंदर सकारात्मक माहौल और आत्मविश्वास ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाई दी है, और कप्तान मानते हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है।“हमने सीखा है कि जब डर खत्म होता है, तभी जीत शुरू होती है।'
(भाषा)
