निशिन: भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को फाइनल मुकाबले में 19 रन के अंतर से पटखनी देकर लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। तीन साल पहले रुतुराज गायकवाड़ की कप्तानी वाली भारतीय टीम स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही थी। उस स्वर्णिम सफर को श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम ने जारी रखा। मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने अभिषेक शर्मा की 28 गेंद में 61, तिलक वर्मा की 22 गेंद में 51 और शिवम दुबे की 15 गेंद में 27 रन की आतिशी पारी की बदौलत 6 विकेट पर 211 रन का स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में पाकिस्तान की टीम 6 विकेट पर 192 रन बना सकी और 19 रन से मुकाबला गंवा दिया।
शिवम दुबे
फाइनल मुकाबले में अपने ऑलराउंड प्रदर्शन के बल पर टीम इंडिया को खिताबी जीत दिलाने में अहम भूमिका शिवम दुबे ने निभाई। उन्होंने 15 गेंद में 27 रन की आतिशी पारी खेलने के बाद गेंदबाजी में 33 रन देकर 2 विकेट अपने नाम किए। टीम की खिताबी जीत के बाद शिवम दुबे ने टाइम्स नाउ संवाददाता करिश्मा सिंह से बातचीत करते हुए टीम इंडिया के गोल्ड मेडल जीतने पर खुशी जताते हुए इसकी अहमियत साझा की।
हमारे लिए है बेशकीमती जीत
क्या स्वर्ण पदक जीतना आईसीसी टूर्नामेंट या विश्व कप की जीत से अगल है? इसके जवाब में दो बार के टी20 विश्व कप विजेता खिलाड़ी शिवम दुबे ने कहा, यह उससे अलग नहीं है, हम वहां भी क्रिकेट खेलते हैं और यहां भी क्रिकेट खेलते हैं। विश्व कप, एशिया कप और यह सब अलग हैं। आप हर चीज की तुलना नहीं कर सकते। यह हमारे लिए बेशकीमती है और हम गोल्ड मेडल का बचाव करके वास्तव में बहुत खुश हैं।
फैन्स नहीं आने देते हैं दबाव
पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में बड़ी संख्या में प्रशंसकों की मौजूदगी में खेलने के अनुभव के बारे में शिवम ने कहा, मुझे लगता है कि प्रशंसक हमेशा हमारे साथ रहते हैं। हम बहुत आभारी हैं कि हम जहां भी खेलते हैं, वे हमेशा हमारा समर्थन करने के लिए वहां मौजूद रहते हैं। उनका समर्थन पाना बहुत अच्छा लगता है। यह सिर्फ पाकिस्तान के मैच के बारे में नहीं है, पिछले मैच में भी जब हम श्रीलंका के खिलाफ खेले थे, तब भी प्रशंसक वहां थे और उन्होंने हमारा समर्थन किया था। आज भी वही स्थिति थी, इसलिए मुझे किसी भी मैच में बहुत ज्यादा दबाव महसूस नहीं होता। लेकिन खिताब का बचाव करने के लिए आपको बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
शानदार रही तिलक के साथ साझेदारी
तिलक वर्मा के साथ साझेदारी के बारे में शिवम ने कहा, हमने एक साथ काफी क्रिकेट खेला है, इसलिए हम जानते हैं कि हम दोनों क्या कर सकते हैं। इसलिए हम यह नहीं सोच रहे थे कि स्कोर क्या होगा। वह मुझे पिच और गेंदबाज के बारे में बता रहा था और अगर मेरे पास कोई नया आइडिया था तो मैं उसे साझा कर रहा था। इसलिए हम हर गेंद पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे ताकि हम बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
जापान में बढ़ेगा क्रिकेट
जापान में क्रिकेट खेलने के अनुभव के बारे में भारतीय ऑलराउंडर ने कहा, जापान में निश्चित रूप से भविष्य में यहां क्रिकेट बढ़ेगा। झे लगता है कि उन्होंने जो मैदान और सुविधाएं बनाई हैं, वे अद्भुत हैं। हमने उनका लुत्फ उठाया। हमारे लिए थोड़ा कठिन रहा क्योंकि जब भी हम अभ्यास करना चाहते थे, बारिश हो जाती थी। ऐसे में हमारे कोच और कप्तान ने कहा कि एक टीम के रूप में हमने काफी क्रिकेट खेला है और हमारे पास बहुत अनुभव है, इसलिए मानसिक रूप से हमें खुद को तैयार रखना चाहिए कि हम क्या कर सकते हैं।
ट्रॉफी जीतने से अलग है मेडल जीतना
ट्ऱॉफी जीतने की तुलना में गोल्ड मेडल जीतने के अनुभव के बारे में शिवम ने कहा, यह निश्चित रूप से यह एक अलग फीलिंग है। लेकिन आप इन सब चीजों की तुलना नहीं कर सकते। आप जो कुछ भी करते हैं, अपने देश के लिए करते हैं वह हमारे लिए अधिक महत्वपूर्ण है। बीसीसीआई हमारा बहुत समर्थन करता है, इसलिए हम जो भी करते हैं अपने देश के लिए करते हैं और हमें इस पर गर्व है। मैं अपने मेडल को देश को समर्पित करना चाहता हूं। मुझे लगता है कि उनसे आगे कोई नहीं है।
तिरंगा लहराता देख हुआ गर्व
भारत के लिए खेलना और जीत के बाद भारतीय तिरंगे को ऊपर जाता हुआ देखना, इस अनुभव के बारे में शिवम ने कहा, वो एक अलग फीलिंग है। जब छोटा था तो हमेशा देखता था एशियन गेम्स हो रहे हैं, ओलंपिक हो रहा है। मैं वो कर पाया तो मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है।
अभी दूर हैं ओलंपिक खेल
लॉस एंजिल्स में 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में भी क्रिकेट शामिल है। क्या उसके लिए भी आप एक्साइडेट हैं क्योंकि वहां भी टीम इंडिया से जीत की अपेक्षाएं होंगी। इसके जवाब में शिवम ने कहा, जरूर एक्साइडेट हूं लेकिन वह अभी दूर है।
