स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। टी20 क्रिकेट में कप्तानी केवल मैदान सजाने का काम नहीं है, बल्कि पल-पल बदलते समीकरणों के बीच सही फैसले लेने की कला है। यहां एक गेंद मैच बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है। ऐसे में चयनकर्ता एक ऐसा कप्तान चुनते हैं जो रणनीति बनाने में माहिर और खेल को अच्छे से समझता हो, लेकिन इस वक्त भारतीय टी20 टीम के लिए कुछ भी सही नहीं हो रहा है।
क्या सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाने का फैसला जल्दबाजी?
नए टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर के लगातार तीन बार फेल होने पर क्रिकेट फैंस के मन में शंका पैदा होने लगी है कि क्या सूर्यकुमार यादव को कप्तान पद से हटाना सही था या फिर चयनकर्ताओं ने जल्दबाजी में कोई गलत फैसला ले लिया है। क्योंकि, सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीता। हां ये बात और है कि सूर्या का बल्ला खामोश रहा।
कप्तानी में हिट, बल्ले से फ्लॉप
टी20 विश्व कप में सूर्यकुमार ने 9 पारियों में 136.72 के स्ट्राइक रेट से 242 रन बनाए थे और इसके बाद वह आईपीएल में भी कुछ खास नहीं कर पाए। उन्होंने 13 पारियों में 20.76 की औसत और 147.54 के स्ट्राइक रेट से 270 रन ही बनाए। हालांकि, सूर्या की कप्तानी में भारतीय टीम ने अपना परचम लहराया। सूर्यकुमार यादव जब पहली बार टी20 टीम के कप्तान बने तब, साल 2023 में घर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4-1 से सीरीज जीती। इसके बाद घर से बाहर साउथ अफ्रीका के खिलाफ 1-1 से सीरीज ड्रॉ कराई थी।
इसके बाद रोहित शर्मा के संन्यास के बाद सूर्या को फुल टाइम कप्तान बनाया गया। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टी20 टीम ने 2023 से 2026 तक 52 मैच खेले। इस दौरान टीम को 40 मुकाबलों में जीत मिली और 8 में हार का सामना करना पड़ा। 2 मुकाबले टाई और 2 बेनतीजा भी रहे। स्काई के नेतृत्व में ही मैन इन ब्ल्यू ने टी20 विश्व कप 2026 की ट्रॉफी जीती और इससे पहले एशिया कप का खिताब भी जीता था। सूर्या की कप्तानी में भारतीय टीम ने 12 लगातार टी20I सीरीज (जिसमें टी20 विश्व कप और एशिया कप भी शामिल है) जीती।
धोनी-विराट से बेहतर
सूर्या के विनिंग प्रतिशत की बात करें तो यह 76.92% रहा जो कि एमएस धोनी और विराट कोहली से बेहतर है। धोनी की कप्तानी में भारत ने 72 में से 41 मैच (56.94%) में विजय प्राप्त की थी। वहीं, विराट कोहली के नेतृत्व में टीम इंडिया ने 50 में से 30 मैच (60%) फतेह किए थे। हालांकि, विनिंग प्रतिशत के मामले में रोहित शर्मा ही सूर्यकुमार से ऊपर हैं। हिटमैन की कप्तानी में भारत ने 62 में से 49 टी20 मैच जीते (79.03) थे। 12 मैच भारत ने गंवाए थे और 1 टाई रहा था। रोहित की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने 2024 में टी20 विश्व कप की ट्रॉफी जीतकर सालों का सूखा खत्म किया था। इससे पहले भारतीय टीम ने पहली बार धोनी की कप्तानी में 2007 का टी20 विश्व कप जीता था।
श्रेयस की उम्मीद से विपरीत शुरुआत
वहीं, दूसरी तरफ श्रेयस ने आईपीएल में अपनी कप्तानी क्षमता का परिचय दिया। उनकी कप्तानी में 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने आईपीएल का खिताब अपने नाम किया था। वह दिल्ली कैपिटल्स को 2020 और पंजाब किंग्स को 2025 में अपनी कप्तानी में फाइनल तक ले जा चुके हैं। आईपीएल 2025 में उन्होंने 175.07 के स्ट्राइक रेट से 604 रन बनाए थे, जबकि 2026 में उन्होंने 168.81 के स्ट्राइक रेट से 498 रन बनाए।
श्रेयस अय्यर की कप्तानी का सफर उम्मीद के विपरीत शुरू हुआ है। आयरलैंड के खिलाफ टीम को 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा। आयरलैंड के खिलाफ हार से भारत के लगातार 12 सीरीज जीत का अजेय रथ रुक गया था। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में भी शिकस्त मिली। वह तीन मैच अपनी कप्तानी में गंवा चुके हैं, जबकि एक मैच बारिश की वजह से रद्द हुआ। इस दौरान श्रेयस का बल्ला रन बनाता रहा। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ बतौर कप्तान अपना पहला अर्धशतक जड़ा और टीम की जरूरत के हिसाब से खेल को चलाया।
कहानी बिल्कुल अलग
श्रेयस अय्यर की कप्तानी का अंदाज बिल्कुल अलग है। उनकी कप्तानी में जल्दबाजी नहीं, बल्कि ठहराव दिखाई देता है। वे परिस्थितियों को भांपकर फैसला लेते हैं और टीम को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाते हैं। क्रिकेट के जानकार अक्सर कहते हैं कि अय्यर नाप-तौल कर कदम रखने वाले कप्तान हैं। उनकी रणनीति कई बार धीरे चलो, लेकिन सही चलो की कहावत को चरितार्थ करती है।
अगर दोनों कप्तानों की तुलना की जाए तो तस्वीर बिल्कुल साफ दिखाई देती है। सूर्यकुमार यादव आक्रमण को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं, जबकि श्रेयस अय्यर परिस्थितियों के अनुसार खेल को नियंत्रित करने में भरोसा रखते हैं। एक कप्तान आग से खेलकर सोना तपाने में विश्वास रखता है, तो दूसरा शतरंज के खिलाड़ी की तरह हर चाल सोच-समझकर चलता है।
समय तय करेगा फैसले का नतीजा
सूर्यकुमार को टीम से बाहर करना चयनकर्ताओं का एक कठोर निर्णय है, लेकिन अगर इसमें भावनाओं का समावेश न हो और पहले कभी ऐसा न हुआ हो, तो इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता। प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीफ सेलेक्टर अजीत अगर ने कहा भी कि हमने इस पर काफी चर्चा की, यह कोई आसान बातचीत नहीं थी, खासकर तब जब आपने वर्ल्ड कप जीता हो। किसी न किसी मोड़ पर हमें इस पर चर्चा करनी ही थी। श्रेयस जिस तरह से खेल रहे हैं, उससे यह फैसला लेना आसान हो गया। ऐसे में कहा जा सकता है कि समय ही इस निर्णय का नतीजा तय करेगा।
