पिता गुलाम नबी डार को ना मनाते तो टीम इंडिया को नहीं मिलता आकिब नबी, दोस्त ने पेश की अनोखी मिसाल

श्रीलंका दौरे के लिए आकिब नबी को जसप्रीत बुमराह की जगह टेस्ट टीम में शामिल कर लिया गया है। देर से ही सही पर उन्हें रणजी में शानदार प्रदर्शन करने का ईनाम मिला है। लेकिन यह सब उनके लिए आसान बिल्कुल नहीं था। उनके दोस्त जुबैर ने उनके इस यात्रा के बारे में विस्तार से बात की है।

आकिब नबी का टीम इंडिया में सेलेक्शन होना यह बताता है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। देर से ही सही लेकिन घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने का रिवॉर्ड बीसीसीआई जरूर देती है। शायद घरेलू क्रिकेट का उद्देश्य भी यही है जहां तप कर टीम इंडिया तक पहुंचा जाता है। दो मैच की टेस्ट सीरीज के लिए जब जसप्रीत बुमराह के श्रीलंका ना जाने की खबर आई तो आकिब नबी उन्हें रिप्लेस करने की रेस में सबसे आगे थे। हुआ भी यही और नबी को टीम इंडिया में शामिल कर लिया गया। पिछले दो रणजी सीजन में 104 विकेट लेने वाले नबी को आखिरकार वो ईनाम मिला जिसके वो हकदार थे। लेकिन टीम इंडिया में आने तक का यह सफर इतना भी आसान ना होता अगर उनके दोस्त जुबैर ना होते। जुबैव वही शख्स हैं जिन्होंने उनके पिता को मनाया।

aqib Nabi

आकिब नबी (साभार-X)

पिता नहीं चाहते थे नबी बने क्रिकेटर

जब किशोर उम्र के आकिब नबी को बीसीसीआई के तेज गेंदबाजी शिविर में हिस्सा लेने का मौका मिला तब वह बायो साइंस विषय के साथ 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। इस शिविर में ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा उन्हें तेज गेंदबाजी की बारीकियां सिखाने वाले थे। नबी के पिता गुलाम नबी डार एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और शिक्षा को सबसे अधिक महत्व देते थे। वह चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे और क्रिकेट के लिए पढ़ाई बीच में ना छोड़े। आखिरकार डार मान गए। उनका यह फैसला नबी की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। करीब 13 साल बाद दाएं हाथ के तेज गेंदबाज नबी ने इतिहास रचते हुए जम्मू-कश्मीर के पहले ऐसे क्रिकेटर बनने का गौरव हासिल किया जिन्हें भारत की टेस्ट टीम में जगह मिली। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टीम में चुना गया।

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