ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने 270 रन की शानदार पारी खेलने के बाद हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में करियर के मुश्किल दौर के बारे में बात की। उन्होंने कहा उन्हें ’ ज्यादा सोचने’ और खुद से अनावश्यक उम्मीदें रखने से दूर रहना सीख लिया है और अब उनका पूरा ध्यान सिर्फ रन बनाने और टीम को जीत दिलाने पर है।
ईशान किशन (साभार-X BCCI D)
दलीप ट्रॉफी के फाइनल में साउथ जोन के खिलाफ खेली गई 270 रन की मैराथन पारी को किशन ने अपने अंदर आए इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने दिन का खेल खत्म होने के बाद कहा, "मैंने खुद को बदलने की कोई खास कोशिश नहीं की। यह बदलाव अपने आप हुआ। जब मैं भारतीय टीम से बाहर था, तब मुझे एहसास हुआ कि आखिरकार हमारे पास करने के लिए सिर्फ एक ही काम है और वह रन बनाना है। यही एक चीज है जो आपके करियर में आपकी मदद करती है।’’
केवल रन बनाने पर ध्यान
किशन ने कहा, ’’किसी अन्य चीज के बारे में सोचना आपकी मानसिकता को प्रभावित करता है और बेवजह का दबाव बढ़ाता है। मुझे समझ आ गया कि इन अतिरिक्त विचारों की कोई जरूरत नहीं है। हमारा काम मैदान पर उतरना और टीम के लिए मैच जीतना है।’’ उन्होंने कहा, "आपको बस इसी चीज की परवाह करनी चाहिए। समय के साथ आप खुद को बेहतर तरीके से समझने और विकसित करने लगते हैं। मुझे लगता है कि जब आपका दिमाग स्पष्ट हो तो इस तरह खेलना काफी आसान हो जाता है।"
किशन की वापसी है प्रेरणादायी
किशन 2023 में भारतीय टीम के तीनों प्रारूपों में खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल थे। लेकिन कई अप्रत्याशित घटनाक्रमों के बाद उनका करियर मुश्किल दौर में पहुंच गया और उन्हें बीसीसीआई के केंद्रीय अनुबंध से भी बाहर होना पड़ा। किशन ने इसके बाद घरेलू क्रिकेट में जमकर मेहनत की। उन्होंने 2025-26 रणजी ट्रॉफी में शतक लगाए और झारखंड को उस सत्र की सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीतने में अहम योगदान दिया। उन्होंने टूर्नामेंट में 517 रन बनाए, जिसमें दो शतक शामिल थे। किशन को जल्द ही बीसीसीआई का केंद्रीय अनुबंध वापस मिल गया और सफेद गेंद के प्रारूपों में भारतीय टीम में भी जगह मिल गई। अब वह अपने करियर के उस मुश्किल दौर को पीछे छोड़ चुके हैं। किशन ने कहा, "आजकल मैं जो सबसे अच्छी चीज कर रहा हूं, वह है किसी भी चीज के बारे में ज्यादा न सोचना। एक बल्लेबाज के तौर पर मेरा काम बस मैदान पर जा कर गेंद के मुताबिक प्रतिक्रिया देना है। मैं खुद से किसी तरह की उम्मीद नहीं रखता।’’
फाइनल में उतरने से पहले क्या थी तैयारी?
सीमित ओवरों के मुकाबले खेल कर दलीप ट्रॉफी के लिए पहुंचे किशन से जब पूछा गया कि दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों के खिलाफ फाइनल में उतरते समय उनकी रणनीति क्या थी तो उन्होंने कहा, ’’ यहां आने से पहले मैं बीसीसीआई के ’सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में था। वहां हम सब खास तौर पर लाल गेंद से अभ्यास कर रहे थे। जब आप लगातार टी20 खेलते हैं तो बहुत ज्यादा शॉट खेलने लगते हैं। दलीप ट्रॉफी में पूर्वोत्तर क्षेत्र के खिलाफ मेरी पहली पारी में भी ऐसा ही हुआ।" किशन ने उस पारी की गलती को याद करते हुए कहा, "पारी के बीच में मैं कट शॉट खेलने गया, लेकिन फिर असमंजस में पड़ गया कि गेंद को हिट करना चाहिए या नहीं। इसी सोच में मैं अपना विकेट गंवा बैठा।"
फाइनल में उतरने से पहले किशन ने अपना ध्यान फिर से सही दिशा में लगाया। उन्होंने साथी बल्लेबाजों के साथ ज्यादा समय बिताया और धीरे-धीरे साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ’’जब आप पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रारूपों में खेल चुके होते हैं तो टीम के साथी आपसे रन बनाने की उम्मीद करते हैं। इसलिए मेरे लिए क्रीज पर टिके रहना और अपनी टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा रन बनाना बेहद जरूरी था।’’
