लंदन: भारत और इंग्लैंड के बीच रविवार को लॉर्ड्स में खेला जाने वाला तीसरा एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच भारतीय कप्तान रोहित शर्मा के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मुकाबला हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय चयन समिति की मौजूदा सोच यही है कि इंग्लैंड दौरे के बाद उन्हें भारतीय वनडे टीम में आगे नहीं चुना जाएगा। पिछली आठ वनडे पारियों में 39 वर्षीय रोहित शर्मा ने केवल 241 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 30.1 और स्ट्राइक रेट 88.6 रहा है, जबकि उनके बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक निकला है।
रोहित शर्मा
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर इस दौरे पर टीम के साथ कार्डिफ में मौजूद हैं। सूत्रों का कहना है कि चयनकर्ता अगले वर्ष होने वाले वनडे विश्व कप के लिए दो आईसीसी ट्रॉफी जीत चुके भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को अपनी भविष्य की योजनाओं का हिस्सा नहीं मान रहे हैं। चयन मामलों से जुड़े बीसीसीआई के एक वरिष्ठ सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा,'राष्ट्रीय चयनकर्ता चाहते हैं कि यशस्वी जायसवाल को लंबा मौका दिया जाए। उन्होंने तीन पारियों में दो शतक लगाए हैं। विश्व कप से पहले लगभग 20 वनडे मैच बाकी हैं और जायसवाल को ये सभी मैच खेलने का अवसर मिलना चाहिए।'
सूत्र ने कहा,'कोई भी रोहित शर्मा से संन्यास लेने के लिए नहीं कह सकता। लेकिन यह स्पष्ट है कि सितंबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे श्रृंखला से चयनकर्ता भविष्य की टीम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। रोहित के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला उन्हें स्वयं करना होगा।' सूत्रों के अनुसार, मुख्य कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर इस मुद्दे पर एकमत हैं कि विराट कोहली अपनी मौजूदा फॉर्म और फिटनेस के कारण टीम में स्वतः चयन के हकदार हैं जबकि रोहित शर्मा के मामले में ऐसी स्थिति नहीं है।
यह भी समझा जाता है कि यदि इंग्लैंड दौरे के बाद भी रोहित शर्मा को टीम में बनाए रखा जाता है, तो यशस्वी जायसवाल को महत्वपूर्ण मैच अनुभव से वंचित होना पड़ेगा, जिसे चयनकर्ता उचित नहीं मानते। गौरतलब है कि रोहित शर्मा के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के मुद्दे पर भी चयन समिति और उनके बीच पूरी सहमति नहीं थी। चयन समिति के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे नहीं चाहते थे कि रोहित इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला में केवल दो मैच खेलने के बाद संन्यास का फैसला लें। वहीं, रोहित शर्मा के करीबी लोगों का दावा है कि उनका इरादा सिर्फ दो टेस्ट खेलने का कभी नहीं था और उन्होंने पूरी श्रृंखला के लिए खुद को उपलब्ध रखा था।
