श्रीलंका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे देवदत्त पडिक्कल ने टेस्ट क्रिकेट में अपने मौके और साई सुदर्शन की जगह नंबर 3 पर बल्लेबाजी के मौके पर खुलकर बात की है। उन्होंने यह भी बताया कि रेड बॉल क्रिकेट में लंबा टिकने के लिए वह किससे सलाह रहे हैं। फिलहाल दलीप ट्रॉफी का फाइनल खेल रहे पडिक्कल ने कहा कि भारतीय टेस्ट टीम में जगह पक्की करना आसान नहीं है। श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में लगातार दो शतक लगाने के बावजूद वह किसी भी मौके को हल्के में लेने की भूल नहीं करना चाहते। पडिक्कल को नंबर तीन पर नियमित बल्लेबाज साई सुदर्शन की जगह शामिल किया गया था जो पैर में चोट के कारण नहीं खेल पाए थे। अगर सुदर्शन चोटिल नहीं होते तो पडिक्कल के लिए टीम के दरवाजे नहीं खुलते। वह पिछली बार नवंबर 2024 में पर्थ में भारत के लिए टेस्ट मैच खेले थे।
देवदत्त पडिक्कल (साभार-BCCI X)
उन्होंने इस मौके को दोनों हाथों से लिया और श्रीलंका के खिलाफ तीन पारियों में 328 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द सीरीज बने। ’जियोस्टार’ से बात करते हुए पडिक्कल ने कहा, ’’इन दिनों आपको कम मौके मिलते हैं और टीम में जगह पक्की करना आसान नहीं है। किसी भी चीज को हल्के में नहीं लिया जा सकता। व्यक्तिगत तौर पर मैं सिर्फ रन बनाते रहना और भारतीय टेस्ट टीम की जीत में योगदान देना चाहता हूं। जब तक मैं ऐसा करता रहूंगा मुझे यकीन है कि टीम में मेरी जगह बनी रहेगी।’’
जब-तक फॉर्म तब-तक टीम में जगह
उन्होंने कहा, ’’जब तक मैं रन बना रहा हूं तो मुझे लगता है कि इससे टीम को हमेशा फायदा होगा। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि टेस्ट क्रिकेट आसान फॉर्मेट नहीं है इसलिए आपको दिन-प्रतिदिन अच्छा प्रदर्शन करते रहना होता है।’’ पडिक्कल ने बताया कि श्रृंखला शुरू होने से पहले ही टीम प्रबंधन ने उन्हें दोनों टेस्ट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने की जानकारी दे दी थी।
राहुल द्रविड़ से लिया टिप्स
बेंगलुरु के इस बल्लेबाज ने 2024 की शुरुआत में राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। उन्होंने कहा कि भारत के महानतम नंबर तीन बल्लेबाजों में से एक द्रविड़ से बल्लेबाजी को लेकर सलाह लेने का मौका मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात थी। पडिक्कल ने कहा, ’’मैंने पिछले कुछ वर्षों में उनसे (द्रविड़) बल्लेबाजी और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने के लिए क्या करना होता है इस बारे में काफी बातचीत की है। फिर बात तैयारी और यह समझने पर आती है कि आप क्या करना चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा, ’’जब आपके दिमाग में अपनी योजनाओं को लेकर स्पष्टता होती है और आप जानते हैं कि मैदान पर जाकर आपको क्या करना है तो इससे काफी मदद मिलती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस स्थान पर बल्लेबाजी कर रहे हैं। मेरे और उनके बीच मुख्य रूप से इन्हीं चीजों को लेकर बातचीत हुई है।’’
