IND vs SL Test: श्रीलंका दौरे से पहले टीम इंडिया के लिए फिटनेस टेस्ट का मानक और कठिन कर दिया गया है। आयरलैंड और इंग्लैंड में हाल में मिले निराशाजनक नतीजों के बाद BCCI ने खिलाड़ियों के फिटनेस मानकों को ज्यादा सख्त बनाने का फैसला लिया है। अब हर खिलाड़ी को चयन के लिए दो मुश्किल फिटनेस टेस्ट पास करने होंगे। पहला है ब्रोंको टेस्ट और दूसरा लगातार 2 किलोमीटर की दौड़ है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि दोनों टेस्ट अब बैक-टू-बैक होंगे और इसके बीच में खिलाड़ियों को कोई आराम नहीं मिलेगा।
भारतीय टीम का नया फिटनेस रूल (फोटो साभार- BCCI)
ब्रोंको में 40 सेकेंड की कटौती
पहले ब्रोंको टेस्ट पूरा करने के लिए 6 मिनट मिलते थे। नए नियम में इसे घटाकर 5 मिनट 15 सेकेंड से 5 मिनट 20 सेकेंड कर दिया गया है। इसमें 5 सेट लगाने होते हैं। हर सेट में 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर की शटल रन शामिल है। एक सेट 240 मीटर का होता है। यानी पूरे टेस्ट में 1200 मीटर बिना रुके दौड़ना है।
दो किलोमीटर की दौड़ तुरंत बाद
ब्रोंको खत्म होते ही खिलाड़ियों को तुरंत 2 किलोमीटर दौड़ लगानी होगी। पहले यह अलग से होता था। तब फास्ट बॉलर्स के लिए समय 8 मिनट 15 सेकेंड और बाकी खिलाड़ियों के लिए 8 मिनट 30 सेकेंड था। हालांकि, अब सभी के लिए समय 9 से 10 मिनट कर दिया गया है, लेकिन थकान के साथ दौड़ने की वजह से यह और चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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क्यों बदले नियम?
BCCI के सूत्रों का कहना है कि पिछले साल मानकों में ढिलाई बरती गई थी। टीम मैनेजमेंट के दबाव में कुछ खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट न होने पर भी क्लियरेंस मिल गई। इंग्लैंड दौरे पर वजन ज्यादा होने के कारण हर्षित राणा को वापस भी भेजना पड़ा था। उस समय उनका वजन 97 किलो था। अब CoE ने वजन 96 किलो से नीचे लाने का टारगेट दिया है। वर्तमान में उनका वजन 94 किलो है। लगातार चोट और मैच के दौरान क्रैम्प्स की शिकायतों के बाद बोर्ड सचिव ने टीम फिजियो से भी जवाब मांगा है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि स्टार खिलाड़ी हो या जूनियर, फिटनेस में कमी दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करें।
ओवर-ट्रेनिंग का डर
विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 से 2025 तक भारत का इंजरी मैनेजमेंट बेहतर था। तब यो-यो और अन्य टेस्ट सिर्फ 6 महीने में एक बार या चोट से वापसी पर होते थे। अब CoE में बार-बार टेस्ट होने से बर्नआउट और चोट का खतरा बढ़ सकता है।
