ग्लास्गो: भारत की 23 वर्षीय महिला जूडोका अस्मिता डे ने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 48 किलो भारवर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। वो राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। अस्मिता डे ने सडन डेथ तक गए मुकाबले में गोल्डन स्कोर के जरिए अंक अर्जित करके भारत को ग्लास्गो राष्टमंडल खेलों में चौथा गोल्ड मेडल दिलाकर इतिहास रच दिया। अस्मिता डे ने कनाडा की हैदी क्वाश को मात दी। यह भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पहला गोल्ड मेडल है। ऐसे में अस्मिता ने अपना नाम इतिहास में हमेशा के लिए स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया है। अस्मिता ने सेमीफाइनल में स्कॉटलैंड की समर शॉ को हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।
अस्मिता डे
भारत को ग्लास्गो में दिलाया चौथा गोल्ड मेडल
त्रिपुरा की रहने वाली अस्मिता का पदक भारत का ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में चौथा गोल्ड और कुल 18 वां पदक है। भारत इस पदक के साथ पदक तालिका में नौवें पायदान पर पहुंच गया है। भारत ने 23वें राष्ट्रमंडल खेलों में अबतक 4 गोल्ड, 10 रजत और 4 कांस्य पदक अपने नाम किए हैं। अस्मिता की स्वर्णिम जीत से पहले भारत दसवें पायदान पर था। गोल्ड मेडल से भारत को एक स्थान का फायदा हुआ है।
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जू़डो में दो और गोल्ड मेडल की है आस
इसके अलावा भारत ने के पास पुरुषों के 60 किलोग्राम और महिलाओं के 57 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में भी गोल्ड मेडल जीतने का मौका है। भारत के हर्ष सिंह 60 किग्रा के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के कैट्ज जोशुआ से गोल्ड के लिए भिड़ंत होगी। सेमीफाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पेद्रो कार्लोस एंटुन नेटो को हराया था। मध्यप्रदेश के सागर की रहने वाली यामिनी मौर्य ने जिन्होंने 57 किलोग्राम भारवर्ग में फाइनल में अपनी जगह पक्की की। उन्होंने यह मुकाबला केवल 58 सेकेंड में इप्पोन के जरिए खत्म कर लिया।
