Washing Hands In Plate: कई लोग खाना खाते ही थाली में पानी डालकर हाथ धो लेते हैं। उन्हें लगता है कि इसमें कोई बुराई नहीं है,लेकिन शास्त्रों के अनुसार ये छोटी सी आदत आपके पूरे जीवन को बिगाड़ सकती है। ऐसा करने से घर में बरकत रुक जाती है और पैसे की किल्लत होती है। इसके साथ ही हर काम में रुकावट आती है। आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए?
क्या कहती है मनुस्मृति?
मनुस्मृति के अनुसार, जूठा हाथ और पीने के लिए रखा पानी कभी आपस में नहीं मिलने चाहिए। श्लोक है कि ‘उच्छिष्टं च न स्पृशेद् जलं न च जलं स्पृशेद् उच्छिष्टम्॥’। खाना खाने के बाद या हाथ गंदे होने पर पानी को नहीं छूना चाहिए और यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पानी में कोई उच्छिष्ट या अशुद्ध चीज न मिले।
चाणक्य नीति में बताया गया है नियम
चाणक्य नीति के अनुसार भी थाली में हाथ धोने से आपकी मेहनत और अच्छे कर्म भी व्यर्थ हो जाते हैं। आपके काम शुरू तो होते हैं, लेकिन पूरे नहीं होते हैं।
अन्नपूर्णा माता हो जाती हैं नाराज
शास्त्रों में भोजन को अन्नपूर्णा माता का प्रसाद माना गया है। जब आप थाली में जूठा पानी डालते हैं, तो अन्न अपवित्र हो जाता है। इससे माता बहुत नाराज हो जाती हैं। नतीजा ये होता है कि घर में खाना बर्बाद होने लगता है, बरकत खत्म हो जाती है और पैसा आता तो है, लेकिन रुकता नहीं है। आप जितना कमाएंगे, उतना ही खर्च हो जाएगा।
धन की होती है कमी
लक्ष्मी जी हमेशा साफ-सुथरे और शुद्ध स्थान पर रहती हैं। थाली में जूठा पानी डालने से पूरे घर में अपवित्रता फैलती है। इससे लक्ष्मी जी रुष्ट होकर चली जाती हैं। धन की हानि शुरू हो जाती है, नौकरी या बिजनेस में रुकावटें आने लगती हैं। आप देखोगे कि काम शुरू तो हो जाता है, लेकिन आखिरी पल में अटक जाता है।
पितृदोष भी लग जाता है
पितर हमारे भोजन से जुड़े होते हैं। थाली में हाथ धोने से उनका हिस्सा अपवित्र हो जाता है। इससे पितृदोष लगता है। घर में कलह बढ़ने लगती है, रिश्तों में तनाव आता है और संतान को भी परेशानी होती है।
अगले जन्म में भी भुगतना पड़ता है
पुराणों में स्पष्ट लिखा है कि जूठे पानी से भोजन में दोष लगता है। इससे अगले जन्म में गरीबी, बीमारी या कोढ़ जैसे दंड मिलते हैं। ये छोटी सी आदत आज के जीवन में तो नुकसान देती ही है, अगले जन्म में भी दुख का कारण बनती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
