Vishu Kani 2024 Date, Time And Mahatva: भारत के केरल राज्य में मेष संक्रांति को विशु पर्व के रूप में मनाया जाता है। यहां के मालाबार क्षेत्र के निवाशी विषु को ज्योतिषीय नव वर्ष के तौर पर मनाते हैं। ये पर्व केरल के सबसे प्रमुख पर्वों में से एक होता है। विशु कानी में मलयालम शब्द ‘कानी’ का अर्थ है जो पहले देखा जाता है। इस तरह से विशुक्कनी या विशु कानी शब्द का अर्थ हुआ वह जो विशु के दिन जागने के बाद सबसे पहले देखा जाए। इसके लिए विशुक्कनी को घर के पूजा कक्ष में विषु पर्व से एक दिन पहले ही रख दिया जाता है। जिससे लोग सुबह उठकर इस शुभ चीज के सबसे पहले दर्शन कर सकें और उनके लिए पूरा साल शुभ रह सके।
Vishu Kani Items 2024
विषु कानी 2024 तिथि व मुहूर्त (Vishu Kani 2024 Time)
विषु कानी पर्व इस साल 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। विषु कानी के दिन संक्रान्ति का क्षण 13 अप्रैल रात 09 बजकर 15 मिनट का है।
विषु कानी सामग्री फोटो (Vishu Kani Items Image)
विषुक्कणी सामग्री (Vishukani Items List)
- कोन्ना फूलों का एक गुच्छा
- भगवान विष्णु / कृष्ण की एक छवि या मूर्ति
- दीपक
- चावल
- फल
- सब्जियां
- सुपारी
- नारियल
- दर्पण
- अंगूर
- संतरा
- खीरा
- सोना
- कसावु मुंडू
- पवित्र पुस्तक (रामायण या भगवद गीता)
- सिक्के
विशु कानी कैसे तैयार किया जाता है (How To Prepare Vishukani)
विशु पर्व के दिन रात 12 बजे ही लोग चावल, कटहल, नींबू, सुनहरी ककड़ी, खीरा, संतरा, अंगूर, पान के पत्ते, एक तेल का दीपक, दर्पण, सुनहरे पीले कोन्ना फूल, सिक्के, पैसे, रामायण या फिर भगवद्गगीता ये सभी चीजें भगवान विष्णु या भगवान कृष्ण की तस्वीर के सामने रखे देते हैं। ये सभी सामग्री समृद्धि का प्रतीक है। सुबह जागने के बाद परिवार के सभी सदस्य प्रथम दर्शन इसी के ही करते हैं। इस रस्म को ही विषु कानी या विषुक्कणी कहते हैं। मान्यता है इस रस्म को निभाने से घर-परिवार में पूरे साल सुख-समृद्धि बनी रहती है। बता दें विशुक्कनी को व्यवस्थित करना और देखना विशु पर्व का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है।
विशु कानी पर्व कैसे मनाते हैं (How To Celebrate Vishukani)
परिवार के सभी लोग इस दिन सुबह जल्दी उठते हैं और पूजा घर में अपनी आंखें बंद करके जाते हैं ताकि सबसे पहले वे विशुक्कनी के दर्शन कर सकें। किंवदंती के अनुसार, नए साल के इस शुभ अवसर पर विशुक्कनी को पहली चीज के रूप में देखना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे पूरे साल सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन लोग घरों के सामने कोलम भी बनाते हैं। लोग मंदिर जाते हैं और भगवान की विशेष पूजा करते हैं। इसी के साथ नए कपड़े पहनते हैं और पारंपरिक दावत का आनंद लेते हैं। इस भोज में मुख्य रूप से नमकीन, मीठे, खट्टे और कड़वे व्यंजन शामिल होते हैं।
