Vinayak Chaturthi Vrat Katha (Ganesh Ji Ki Kahani): आज विनायक चतुर्थी पर्व है। इस दिन लोग भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए व्रत-पूजन करते हैं। मान्यता है जो व्यक्ति सच्चे मन से विनायक यानि गणेश चतुर्थी का व्रत करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही उसके जीवन में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती। इस दिन भगवान गणपति की पूजा दोपहर के समय की जाती है। जानिए गणेश विनायक चतुर्थी की कथा।
Vinayak Chaturthi Vrat Katha In Hindi
एक बुढ़िया माई थी जो मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। लेकिन वो रोज मिट्टी के गणेश बनाए वो रोज गल जाए। एक बार उसके घर के सामने सेठ का मकान बन रहा था। वो मकान बनाने वाले कारीगर से जाकर बोली मेरे लिए पत्थर का गणेश बना दो। मिस्त्री बोले जितने हम तेरा पत्थर का गणेश घड़ेंगे उतने में हम अपनी दीवार ना चिनेंगे।
बुढ़िया बोली राम करे तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। ऐसा कहते ही उनकी दीवार टेढ़ी हो गई। अब वो जितनी बार दीवार चिनें और वो ढा जाए, चिने और ढा देवें। इस तरह करते-करते शाम हो गई। शाम को सेठ जी आये तो बोले आज कुछ काम नहीं किया।
मकान बनाने वाले एक मिस्त्री ने सेठ जी को बताया कि एक बुढ़िया आई थी वो कह रही थी मेरा पत्थर का गणेश घड़ दो, हमने उसकी बात नहीं मानी तो उसने कहा तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। बस तभी से हमारी दीवार सीधी नहीं बन रही है। बनाते हैं और ढ़ा देते हैं।
सेठ ने बुढ़िया को बुलवाकर कहा हम तेरा सोने का गणेश गढ़ देंगे। बस हमारी दीवार सीधी कर दो। सेठ ने बुढ़िया के लिए सोने का गणेश गढ़ा दिया और सेठ की दीवार सीधी हो गई। हे विनायक जी जैसे सेठ की दीवार सीधी की वैसी सबकी करना।
