Vat savitri Vrat Puja Vidhi, Muhurat: घर पर कैसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा, जान लें शुभ मुहूर्त और नियम

Vat Savitri Vrat Puja Vidhi, Vrat Ki Samgri List, (वट सावित्री व्रत की पूजा विधि, कथा, सामग्री की लिस्ट और कथा ) Bhog, Aarti Ganesh Ji ki, Vat Savitri Puja Ghar Par Kaise Kare: वट सावित्री व्रत इस साल 26 मई को रखा जाएगा। अगर आप पहली बार ये व्रत रख रही हैं तो जरूर जान लें इस व्रत की सही पूजा विधि और सामग्री लिस्ट।

Vat Savitri Vrat Puja Vidhi, Samagri List: वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक प्रमुख व्रत है। करवा चौथ की तरह ही ये व्रत भी पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को पड़ता है। इस दिन विशेष रूप से वट यानी बड़ वृक्ष की पूजा की जाती है। साथ ही महिलाएं वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री सत्यवान की कथा भी सुनती हैं। चलिए आपको बताते हैं इस व्रत को करने की विधि क्या है और पूजा में क्या-क्या सामान लगेगा।

वट सावित्री पूजा विधि (Vat Savitri Puja Vidhi Step By Step In Hindi)

  • सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय ये कहना है "मैं वट सावित्री व्रत का संकल्प लेती हूँ, जिससे मेरे पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति बनी रहे।"
  • अगर आपके घर के पास वट वृक्ष है तो वहां जाकर पूजा करें अगर नहीं है तो घर पर ही गमले में मिट्टी डालकर उसमें वट की छोटी टहनी लगा दें। फिर इसकी विधि विधान पूजा करें।
  • वट वृक्ष की टहनी भी नहीं है तब आप इसकी जगह पर पीपल या तुलसी के पौधे की पूजा भी कर सकते हैं।
  • वट वृक्ष के चारों ओर साफ सफाई करके मंडप या चौक बनाएं।
  • वट वृक्ष को स्नान कराएं – जल, दूध, गंगाजल से।
  • साथ ही हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई अर्पित करें।
  • दीपक और धूप जलाएं।
  • वृक्ष की 7, 11 या 108 बार परिक्रमा करें और हर परिक्रमा में मौली लपेटते हुए पति की लंबी उम्र की कामना करें।
  • इसके बाद व्रत कथा पढ़ें या इसका श्रवण करें।
  • कथा सुनने के बाद "वट सावित्री व्रत की कथा समाप्त" कहें।
  • फिर "ॐ वट वृक्षाय नमः" मंत्र का जाप करें।
  • सावित्री माता और सत्यवान को स्मरण करते हुए विधि विधान आरती करें।
  • इसके बाद ब्राह्मण को वस्त्र, फल, दक्षिणा दान करें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
  • उपवास की समाप्ति जल और फल से करें।

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