Varuthini Ekadashi Vrat Katha In Hindi: हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पाप, ताप और दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही व्रत करने वाले व्यक्ति को अंत में स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। इस साल वरुथिनी एकादशी व्रत 4 मई को रखा जा रहा है। कहते हैं जो व्यक्ति इस व्रत को पूरी सच्चे मन से रखता है उसे भगवान मधुसुदन और श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यहां जानिए वरुथिनी एकादशी की कथा।
Varuthini Ekadashi Vrat Katha
वरुथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha In Hindi)
वैशाख महीने की एकादशी कथा के अनुसार प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम का एक राजा राज्य करता था। जो अत्यंत दानशील और तपस्वी व्यक्ति था। एक दिन राजा जंगल में जब तपस्या कर रहा था तभी न जाने कहां से एक जंगली भालू आ गया और उसने राजा का पैर चबाना शुरू कर दिया। इसके बाद भी राजा अपनी तपस्या में लीन रहे। कुछ देर बाद भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया।
राजा बहुत घबरा गया था लेकिन तापस धर्म अनुकूल उसने क्रोध और हिंसा नहीं की। बल्किन वह भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगा। उसकी पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने अपने चक्र से भालू को मार डाला। लेकिन राजा का पैर भालू पहले ही खा चुका था। जिससे राजा को बहुत दुख हुआ।
राजा को दुखी देखकर भगवान विष्णु बोले: हे वत्स! तुम शोक मत करो। मथुरा जाओ और विधि विधान वरूथिनी एकादशी का व्रत रखो और वहां मेरे वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो। उसके प्रभाव से निश्चित ही तुम सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे। इस भालू का तुम्हे काटना तुम्हारे पूर्व जन्म का ही अपराध था।
भगवान की आज्ञा अनुसार राजा मान्धाता ने मथुरा जाकर वरूथिनी एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से राजा शीघ्र ही सुंदर और संपूर्ण अंगों वाला हो गया। साथ ही इसी एकादशी के प्रभाव से राजा को अंत में स्वर्ग की प्राप्ति हुई। कहते हैं जो भी व्यक्ति भय से पीड़ित है उसे वरूथिनी एकादशी का व्रत रजरूर करना चाहिए। इस व्रत को करने से समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है।
