Kashi Vishwabath Mandir, Uttarkashi: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बादल फटने से भयानक तबाही आई है। अब तक 4 लोगों के मौत और 50 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। उत्तरकाशी को भगवान शिव की नगरी भी कहा जाता है। यहां भागीरथी नदी के किनारे भगवान विश्वनाथ का बेहद प्राचीन मंदिर है। मान्यता है कि काशी के अलावा भगवान विश्वनाथ ने अपना दूसरा ठिकाना यहीं बनाया था। इसीलिए इसे उत्तर का काशी (उत्तरकाशी) कहा जाता है। आइए जानते हैं उत्तरकाशी के इस विश्वनाथ मंदिर का इतिहास, महत्व और मान्यता:
उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मिंदिर (Photo: Uttarakhand Tourism)
उत्तराखंड में भी है काशी विश्वनाथ मंदिर (Photo: Uttarakhand Tourism)
उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर का इतिहास
उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर को लेकर पौराणिक मान्यता है कि इसका निर्माण स्वयं भगवान परशुराम ने की थी। वर्तमान में जिस तरह से मंदिर नजर आता है उसका श्रेय टिहरी गढ़वाल की रानी खनेटी देवी को जाता है। साल 1857 में खनेटी देवी जो तत्कालीन राजा सुदर्शन शाह की पत्नी थीं, ने मंदिर का पूर्णोद्धार करवाया था। मंदिर का निर्माण कत्यूरी शैली में किया गया है। इसमें सिर्फ पत्थरों का इस्तेमाल है।
काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तरकाशी (Photo: Uttarakhand Tourism)
अंदर से कैसा है काशी विश्वनाथ मंदिर का गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में भगवान विश्वनाथ 56 सेंटीमीटर ऊंचे और दक्षिण की ओर झुके हुए पाषाण शिवलिंग के तौर पर विराजमान है। मान्यता है कि भगवान विश्वनाथ के बड़े भक्त मार्कंडेय ऋषि को लेने जब यमराज आए तो वह शिवलिंग से लिपट गए। भगवान के आदेश पर यमराज को वापस जाना पड़ा था। लिपटने के कारण की शिवलिंग एक तरफ झुका हुआ बताया जाता है। गर्भगृह में काशी विश्वनाथ के साथ ही माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियां भी विराजमान हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर के अंदर हैं कई मंदिर
उत्तरकाशी के इस प्राचीन विश्वनाथ मंदिर के परिसर में और भी कई मंदिर हैं। इनमें सबसे ज्यादा मान्यता गर्भगृह के ठीक सामने स्थित शक्ति मंदिर का है। यहां देवी 16.5 फीट ऊंचे एक विशाल त्रिशूल के रूप में विराजमान हैं। यह त्रिशूल करीब 1500 साल पुराना बताया जाता है। यह त्रिशूल उत्तराखंड के तमाम प्रतीकों में से एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी है।
शक्ति मंदिर (Photo: facebook)
विश्वनाथ मंदिर का महत्व
ऐसी मान्यता है कि गंगोत्री और यमुनोत्री की तीर्थयात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना ना की जाए। इस मंदिर के महंत जयेंद्र पुरी कहते हैं कि कलयुग में उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर का खास महत्व है। यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। इसी कारण हर साल सावन मास में इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आती है।
