Totkay for Couple: अशाेक का पेड़ सदाबहार तो है ही साथ ही प्रदूषण और क्लेश को दूर भी करता है। इसके लंबे और सीधे पत्तों की वंदनवार बनाकर मांगलिक अवसरों पर दुकानों और घर के दरवाजे पर लगाया जाता है। लंका में सीता जी को अशाेक वृक्ष के नीचे ही रखा गया था। इस वृक्ष को शाेकनाशक इसलिए कहा गया है कि क्योंकि इसने सीताजी के शाेक का नाश किया था। इसकी छाल बाहर से खुरदुरी और अंदर से रक्त वर्ण की होती है। इस वृक्ष को लगाने का बहुत महत्व है। इसके फूल नारंगी और सफेद दो प्रकार के होते हैं। इसे धन− संपत्ति की वृद्धि करने वाली वनस्पति कहा जाता है। स्त्री रोगों को दवाएं अधिकतर इसके योग से ही बनती है। यदि घर में पति− पत्नी के मध्य विवाद रहता है तो अशोक वृक्ष के कुछ उपाय चमत्कारी लाभ देते हैं।
अशाेक वृक्ष और पत्तों का प्रयोग
- यदि वंदनवार इसके पत्तों की बने और इतनी नीची रहे जो सिर से स्पर्श होती है तो व्यक्तिगत सफलता ही प्राप्त होने के योग बनते हैं।
- इसकी जड़ को विधि अनुसार लाकर दुकान में, घर में रखने से धन संपत्ति आती है।
- पति−पत्नी में प्रायः अनबन रहती हो तो अशाेक के सात पत्तों को देव की प्रतिमा के सम्ममुख रखकर पूजा करें। यदि पत्ते मुरझाएं हों तो उनकी जगह दूसरे पत्ते ले आएं या इसे बदलते रहें। पुराने पत्तों पीपल वृक्ष के नीचे डलते रहें। इससे पति− पत्नी के संबंधाें में मधुरता आती है।
- इसके फूल को पीसकर शहद के साथ चाटने से जहां स्वास्थ्य को लाभ मिलता है, वहीं यह प्रयोग दरिद्रता को दूर करता है।
- इसकी छाल को पानी में उबाल कर पीने से स्त्री लाभ मिलता है। अशाेकारिष्ट इसकी प्रमुख आयुर्वेदिक औषधि है।
- दुर्गा आदि देवियों के उपासक वृक्ष को श्रद्धापूर्वक जल से सींखा करें और देवी से संबंधित मंत्र का जाप करें तो यह कार्य उनके तेज में वृद्धि करता है।
- इसका एक बीज तांबे के ताबीज में रखकर विश्वासपूर्वक गले में धारण करना, हर कार्य में सफलता दिलाता है।
अशाेक के सूखे पत्ते भी देते हैं लाभ
किसी शुभ अवसर, त्योहारों पर अशाेक के पत्तों की वंदनवार बांधी जाती है। ये वंदनवार सूख जाने के बाद भी उतारी नहीं जाती जब तक कि वंदनवार बांधने के लिए दोबारा से शुभ अवसर नहीं आ जाता। इसके पीछे कारण है कि अशाेक के पत्ते सूख जाने के बाद भी तांत्रिक प्रभाव रखते हैं।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
