Tulsi Vivah 2022: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह कराया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु पूरे चार माह के बाद योग निद्रा से जागते हैं। इसके बाद श्री हरि के शालिग्राम स्वरूप का विवाह तुलसी के साथ कराया जाता है। ऐसी मान्यताएं हैं कि तुलसी के पौधे में स्वयं भगवान लक्ष्मीनारायण का वास होता है। इसी वजह से लोग अपने घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगाते हैं। क्या आप जानते हैं कि हिन्दू धर्म में तुलसी के दो प्रकार बताए गए हैं- रामा तुलसी और श्यामा तुलसी। आइए जानते हैं कि इन दोनों तुलसी में क्या अंतर है।
रामा-श्यामा तुलसी में क्या होता है अंतर
रामा तुलसी
ऐसा कहा जाता है कि जिस तुलसी के पत्तों का रंग हरा होता है, वो रामा तुलसी कहलाती है। यह भगवान श्री राम की प्रिय तुलसी थी। इसके पत्तों में थोड़ा मीठापन होता है। इस तुलसी का प्रयोग पूजा-पाठ में भी किया जाता है। ऐसी मान्यताओं हैं कि इसे घर में लगाने से शांति और सुख, समृद्धि बढ़ती है।
श्यामा तुलसी
वहीं, श्यामा तुलसी के पत्ते श्याम रंग में रंगे होते हैं। इनका रंग थोड़ा बैंगनी दिखाई पड़ता है। इसीलिए इसे श्यामा तुलसी कहा जाता है। श्यामा तुलसी को कृष्ण तुलसी भी कहा जाता है। चूंकि इस तुलसी का रंग भगवान श्री कृष्ण के रंग के समान है, इसलिए इसे श्रीकृष्ण से जोड़कर देखा जाता है। इस तुलसी का प्रयोग आयुर्वेद में भी किया जाता है।
घर में कहां रखें तुलसी का पौधा?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रामा या श्यामा कोई भी तुलसी रखी जा सकती है। बस इसमें दिशा का विशेष ख्याल रखें। घर में तुलसी के पौधा सही दिशा में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। तुलसी को हमेशा पूर्व दिशा में लगाना उत्तम माना जाता है।
यदि तुलसी को आप बालकनी या खिड़की के पास रखना चाहते हैं तो इसके लिए उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा बेहतर है। ऐसा कहते हैं कि उत्तर दिशा पानी की दिशा होती है और इस दिशा में तुलसी का पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ये भी सुनिश्चित करें कि तुलसी के पौधे के पास कूड़ा-कचरा या गंदगी न हो।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
