गुरुवार व्रत कथा, जानिए बृहस्पतिवार का व्रत रखने की विधि और लाभ

Guruvar Vrat Katha : गुरुवार का व्रत भगवान बृहस्पतिदेव और विष्णु जी को समर्पित है। इस दिन व्रत को रखने और कथा को पढ़ने या सुनने से धनलाभ होता है। इसके साथ ही जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। यह व्रत हर व्यक्ति के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है तो उसकी लाइफ में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आती है और कर्मों के फल से जो आती भी हैं, वे तुरंत सॉल्व हो जाती हैं। आइए जानते हैं कि गुरुवार व्रत कथा क्या है?

Guruvar Vrat Katha : गुरुवार का व्रत भगवान बृहस्पतिदेव और श्रीहरिविष्णु जी को समर्पित सबसे शुभ व्रतों में से एक है। इसे रखने से कुंडली का गुरु बलवान होता है, धन-धान्य की वर्षा होती है, संतान सुख मिलता है, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में हर तरह की समृद्धि आती है। लाखों लोग आज भी इस व्रत को पूरी श्रद्धा से रखते हैं और इसके चमत्कारिक फल देखते हैं।

गुरुवार व्रत कैसे करें

गुरुवार व्रत कैसे करें

कैसे रखे गुरुवार का व्रत

यह व्रत बहुत आसान है, बस मन साफ और श्रद्धा पूरी होनी चाहिए। सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और पीले या केसरिया रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की मूर्ति या फोटो रखें। अगर संभव हो तो केले का पौधा या उसकी जड़ पूजा में रखें क्योंकि केला गुरु का प्रिय वृक्ष है। पीली चीजों जैसे चने की दाल, हल्दी, बेसन के लड्डू, केला या कोई पीला फल भोग में चढ़ाएं। ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ या ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। दिन में एक बार ही पीला भोजन करें। केले, चने की दाल की खिचड़ी, बेसन की रोटी या हल्दी वाला दूध ले सकते हैं, लेकिन नमक बिल्कुल न खाएं। शाम को गुरुवार व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें। रात में चंद्रमा को दूध-केसर मिलाकर अर्घ्य दें और व्रत पूरा करें।

End of Feed