Teej Kab hai 2025 Mein: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल में तीन बार तीज का त्योहार मनाया जाता है। इनके नाम हैं - हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज। 2025 में 26 जुलाई को हरियाली तीज, 12 अगस्त को कजरी तीज और 26 अगस्त को हरतालिका तीज के त्योहार आएंगे। इनमें से हरियाली तीज का त्योहार सावन में आता है। कजरी और हरतालिका तीज भादो यानी भाद्रपद मास में आती हैं। तीनों ही तीज परंपराओं और आस्था से जुड़ी हैं। इनमें विवाहित महिलाएं मेहंदी और श्रृंगार के साथ शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मांगती हैं। देखें 2025 में तीज कब मनाई जाएगी।
Teej kab Hai 2025
तीज कब है 2025 में
- हरियाली तीज 2025 डेट : 26 जुलाई, शनिवार को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाएगा। यह तीज सावन मास में मनाई जाती है।
- कजरी तीज 2025 डेट: 12 अगस्त, मंगलवार को कजरी तीज का त्योहार मनाया जाएगा। यह तीज भाद्रपद मास में मनाई जाती है।
- हरतालिका तीज 2025 डेट: 26 अगस्त, मंगलवार को हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जाएगा। यह तीज भाद्रपद मास में मनाई जाती है।
हरियाली तीज 2025 कब है
इस साल हरियाली तीज का त्योहार 26 जुलाई, शनिवार को मनाया जाएगी। यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। ये मुख्य रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा में मनाई जाती है। हरियाली तीज को माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि 108 जन्मों तक तपस्या करके माता पार्वती ने शिवजी को इसी दिन पर ही पति के रूप में प्राप्त किया था।
कजरी तीज 2025 कब है
इसे कजली तीज या बूढ़ी तीज भी कहते हैं। कजरी तीज को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। 2025 में 12 अगस्त, मंगलवार को कजरी तीज का त्योहार आएगा। यह लोकसंस्कृति से जुड़ा पर्व है जिसमें महिलाएं समूह में पारंपरिक कजरी गीत गाती हैं। इन गीतों में प्रकृति, प्रेम और विरह की भावनाएं वयक्त होती हैं। वहीं बेटियों को ससुराल में मायके की ओर से बायना भेजा जाता है। कजरी तीज पर महिलाएं शिव-पार्वती और चंद्रमा की पूजा करती हैं।
हरतालिका तीज 2025 कब है
26 अगस्त,मंगलवार को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। यह तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह विशेषतौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मनाते हैं। मान्यता है कि माता पार्वती की सखियां इसी दिन ही उन्हें उनके पिता के घर से हरण करके जंगल ले गई थीं, ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा अनुसार भगवान शिव से हो सके। तीनों तीजों में इसे सबसे कठोर व्रत माना जाता है। इस दिल महिलाएं सोलह श्रृंगार कर व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
