Surya Ketu Yuti 2026 : 17 अगस्त 2026 की सुबह 8 बजकर 3 मिनट पर ग्रहों के राजा सूर्य अपनी राशि सिंह में प्रवेश करेंगे। सिंह राशि में पहले से केतु विराजमान हैं। ऐसे में सूर्य के सिंह राशि में पहुंचते ही दोनों ग्रहों की युति बनेगी। वैदिक ज्योतिष में सूर्य और केतु की इस युति को सूर्य-केतु ग्रहण योग कहा जाता है। सूर्य और केतु का यह संयोग कई राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
ग्रहण योग किन राशियों के लिए खराब रहेगा
खास बात यह है कि सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं और इसी राशि में गोचर करने वाले हैं। यानी सूर्य अपनी ही राशि में मजबूत स्थिति में रहेंगे, लेकिन उनके साथ केतु की मौजूदगी सूर्य की ऊर्जा और उससे जुड़े कारकों को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि इस गोचर का असर केवल करियर या आर्थिक मामलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आत्मविश्वास, रिश्तों, पारिवारिक जीवन, प्रतिष्ठा और निर्णय क्षमता पर भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि, इसे वास्तविक खगोलीय सूर्य ग्रहण नहीं समझना चाहिए। यहां ग्रहण योग से आशय ज्योतिषीय रूप से सूर्य और केतु की एक राशि में युति से है। किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में इसका प्रभाव कितना रहेगा, यह उसकी कुंडली, लग्न, चंद्र राशि और दशा-अंतर्दशा पर भी निर्भर करेगा।
क्या होती है सूर्य और केतु की युति
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, आत्मबल, पिता, सम्मान, नेतृत्व, प्रशासन, सरकारी सेवा और प्रतिष्ठा का कारक माना गया है। वहीं केतु को वैराग्य, अलगाव, रहस्य, आध्यात्मिकता, अचानक बदलाव और भ्रम से मुक्ति का कारक माना जाता है।
जब सूर्य और केतु एक साथ आते हैं तो सूर्य की स्पष्टता और केतु की अलगाव वाली ऊर्जा एक-दूसरे को प्रभावित करती है। इससे व्यक्ति को कई बार अपनी पहचान, फैसलों और उपलब्धियों को लेकर असमंजस महसूस हो सकता है।
जैसे किसी व्यक्ति को काम में अच्छा पद मिलने के बावजूद संतुष्टि न मिले, मेहनत का अपेक्षित क्रेडिट न मिलने की शिकायत हो या अचानक किसी पुराने काम से मन हट जाए। कुछ मामलों में पिता या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचारों का मतभेद भी बढ़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि किन राशि वालों के लिए यह युति खराब रह सकती है।
वृषभ राशि
वृषभ राशि से सिंह चौथा भाव है। चौथा भाव माता, घर, प्रॉपर्टी, वाहन और मानसिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य-केतु का प्रभाव घरेलू वातावरण में तनाव बढ़ा सकता है। घर में किसी बात को लेकर मतभेद हो सकते हैं। प्रॉपर्टी या वाहन से जुड़े मामलों में जल्दबाजी करने से बचना होगा। माता की भावनाओं का ध्यान रखना भी जरूरी रहेगा। इस दौरान घर से जुड़े किसी बड़े फैसले को सोच-समझकर ही लेना बेहतर होगा। प्रॉपर्टी और वाहन से जुड़े डॉक्यूमेंट्स बिना जांचे साइन न करें।
उपाय: सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
कर्क राशि
कर्क राशि से सिंह दूसरा भाव है। दूसरा भाव धन, परिवार, बचत और वाणी का कारक होता है। सूर्य-केतु की युति के कारण परिवार में किसी बात को लेकर गलतफहमी हो सकती है। आपकी कही हुई कोई बात रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती है। इस कारण इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखना सबसे ज्यादा जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में भी अचानक खर्च सामने आ सकते हैं। बिजनेस करने वालों को पेमेंट और फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स संभालकर रखने चाहिए। गुस्से में कोई कठोर बात न बोलें।
उपाय: रविवार को गुड़ और गेहूं का दान करें।
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए सूर्य-केतु की युति सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेगी क्योंकि यह संयोग आपकी ही राशि में बन रहा है। गोचर की दृष्टि से सूर्य और केतु आपके प्रथम भाव को प्रभावित करेंगे। इससे आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कभी आप जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास में आ सकते हैं तो कभी छोटी बात भी मन को परेशान कर सकती है। करियर में अपनी बात मनवाने की कोशिश वरिष्ठ लोगों से टकराव पैदा कर सकती है। रिश्तों में भी ईगो क्लैश से बचना होगा। किसी पुराने निर्णय को लेकर दोबारा सोचने की स्थिति बन सकती है। किसी भी मामले में जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न दें।
उपाय: रोज सुबह सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें और ॐ सूर्याय नमः का जाप करें।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि से सिंह दसवां भाव है। दसवां भाव करियर, नौकरी, पद, प्रतिष्ठा और कर्मक्षेत्र का होता है। इस कारण सूर्य-केतु की युति वृश्चिक राशि वालों के प्रोफेशनल जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकती है। ऑफिस में बॉस या सीनियर्स के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। कुछ लोगों को नौकरी बदलने या वर्तमान काम छोड़ने का विचार अचानक आ सकता है। बिजनेस करने वालों को सरकारी और प्रशासनिक मामलों में अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए। सूर्य यहां करियर में पहचान दिलाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन केतु के कारण व्यक्ति को यह महसूस हो सकता है कि उसे अपनी मेहनत के अनुसार क्रेडिट नहीं मिल रहा है। गुस्से या भावुकता में नौकरी छोड़ने का फैसला न करें।
उपाय: रोज सुबह सूर्य को जल अर्पित करके आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
मकर राशि
मकर राशि से सिंह आठवां भाव है। आठवां भाव अचानक बदलाव, रिस्क, गुप्त मामलों, संयुक्त धन और अप्रत्याशित परिस्थितियों से जुड़ा होता है। सूर्य-केतु का यह संयोग मकर राशि वालों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने का संकेत दे रहा है। इनकम टैक्स, इंश्योरेंस, लोन, निवेश या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में लापरवाही नुकसान दे सकती है। बिना पूरी जानकारी के किसी निवेश में पैसा लगाने से बचें। वाहन चलाते समय भी विशेष सावधानी रखें। किसी भी बड़े आर्थिक रिस्क से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें।
उपाय: बुधवार को गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।
कुंभ राशि
कुंभ राशि से सिंह सातवां भाव है। सातवां भाव विवाह, पार्टनरशिप, बिजनेस पार्टनर और पब्लिक डीलिंग का होता है। सूर्य-केतु की युति रिलेशनशिप्स में गलतफहमी बढ़ा सकती है। शादीशुदा लोगों को पार्टनर की बातों को नजरअंदाज करने से बचना चाहिए। बिजनेस पार्टनर के साथ किसी निर्णय को लेकर मतभेद हो सकता है। जो लोग क्लाइंट्स या जनता से सीधे जुड़े काम करते हैं, उन्हें अपनी भाषा और व्यवहार पर विशेष नियंत्रण रखना होगा। पार्टनरशिप में अहंकार को बीच में न आने दें।
उपाय: रविवार को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को गुड़ का दान करें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और ज्योतिष विद्या के अच्छे जानकार लेखक द्वारा विश्लेषण करके दी गई है। यह केवल सूचना के लिए दी जा रही है। आपके ऊपर इसका प्रभाव आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और महादशाओं पर भी निर्भर करेगा। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
