महाशिवरात्रि विशेष: इस मंदिर में शिव जी के हृदय में बसते हैं विष्णु, भोलेनाथ की पूजा में होता है तुलसी दल का इस्तेमाल

Lingaraj Temple of Odisha: भोलेनाथ की पूजा में कई चीजों को निषेध बताया गया है। इसमें तुलसी भी शामिल है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा शिव मंदिर भी है जहां महादेव की पूजा में तुलसी को शामिल किया जाता है। मान्‍यता है कि यहां महादेव के दिल में विष्‍णु जी विराजमान हैं।

Lingaraj Temple of Odisha: वैसे तो सृष्टि के कण-कण में भगवान का वास है। महादेव तो यूं भी हर मन में बसते हैं। भारत में महादेव के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग इनमें से ही हैं। इन 12 मंदिरों में शक्ति शिवलिंग स्थापित है। आपको बता दें कि शिवलिंग की पूजा में कुछ चीजों का प्रयोग वर्जित है। इसमें श्रृंगार के सामान, केतकी के फूल और तुलसी दल शिव की पूजा में इस्तेमाल नहीं होते हैं। लेकिन, इस सबसे अलग देश में एक ऐसा भी शिवलिंग है, जहां शिव के हृदय में भगवान विष्णु बसते हैं। इन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग का राजा भी कहा गया है। तो आइए इस महाशिवरात्रि के मौके पर शिव के इस विशेष मंदिर के बारे में जानते हैं।

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Lingaraj Temple of Odisha:

ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित भगवान लिंगराज के मंदिर की पहचान 12 ज्योतिर्लिंगों के राजा के रूप में होती है, यहां भगवान लिंगराज विराजते हैं। इस मंदिर के प्रांगण में छोटी-बड़ी 150 मंदिरें हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजा ययाति प्रथम ने कराया था, यहां विराजे लिंगराज स्वयंभू हैं। यह दुनिया का अकेला मंदिर है, जहां भगवान शिव को बेलपत्र के साथ तुलसी दल भी अर्पित किया जाता है। इसके पीछे की वजह यह है कि इस मंदिर में भगवान शिव और विष्णु एक साथ विराजते हैं।

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