Sawan 2025: सावन से पहले जानें बैद्यनाथ धाम के कामना लिंग की कहानी, माना जाता है शिव-शक्ति का मिलन स्थल

Sawan 2025: भोलेनाथ के प्रिय मास सावन में उनकी पूजा की तैयारी के साथ ही जानें बाबा बैद्यनाथ धाम के कामना लिंग की कहानी। यह अकेला ऐसा शिवलिंग है, जहां माता पार्वती और महादेव एक साथ विराजते हैं। इस धाम को शिव-शक्ति का मिलन स्थल माना जाता है। जानें इसके बारे में।

Sawan 2025: महादेव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से पांचवें नंबर पर आता है बाबा बैद्यनाथ धाम। जिसे रावणेश्वर ज्योतिर्लिंग या फिर कामना लिंग के नाम से भी जाना जाता है। यह द्वादश ज्योतिर्लिंग में अकेला ऐसा शिवलिंग है, जहां माता पार्वती और महादेव एक साथ विराजते हैं। कहते हैं यहां माता सती का हृदय भाग गिरा था। ऐसे में यहां दर्शन-पूजन से भक्तों को महादेव के साथ माता पार्वती का भी आशीर्वाद मिलता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसलिए इसे मनोकामना लिंग या कामना लिंग भी कहा जाता है।

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बाबा बैद्यनाथ धाम (Photo: Wikipedia)

त्रिशूल और पंचशूल में क्या अंतर है

दरअसल, त्रिशूल भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बोधक हैं, वहीं अध्यात्म और सनातन धर्म के अनुसार पंचशूल ब्रह्मांड के पांच तत्वों का प्रतीक है।

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