Sindoor Khridne ka shubh din: हिंदू धर्म में सिंदूर को बहुत पवित्र माना जाता है । विवाहित महिला के लिए सिंदूर सुहाग की निशानी होता हैं। जो भी महिला अपने माथे पर सिंदूर लगा कर रखती है उसका सुहाग हमेशा बना रहता है । मान्यता अनुसार सिंदुर लगाने से पति की आयु लम्बी होती है और सदा सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद मिलता है। सिंदूर लगाने के अपने नियम होते हैं । सिंदूर कैसे लगाना चाहिए, सिंदूर कब खरीदना चाहिए, सिंदूर को कैसे रखना चाहिए और सिंदूर को किसी के साथ बांटना चाहिए या नहीं इसको लेकर कई प्रकार के सवाल मन में आते हैं। आइए जानते हैं सिंदूर लगाने के क्या नियम हैं। सिंदूर को किस प्रकार से लगाना चाहिए ।
Sindoor FAQs
मांग में सिंदूर कैसे लगाएं
सिंदूर को हमेशा मांग के बीचों बीच लगाना चाहिए। सिंदूर लगाने के बाद इसे बालों से छिपाना नहीं चाहिए। पति की लंबी आयु के लिए रोजाना सिंदूर लगाना चाहिए।
सिंदूर को कैसे रखें
हिंदू धर्म के अनुसार सिंदूर को लकड़ी की सिंदूरदानी में रखना शुभ होता है। इसके अलावा सिंदूर को पीतल की सिंदूरदानी में रख सकते हैं।
सिंदूर कहां से खरीदना चाहिए
सिंदूर सुहाग की निशानी होता है। हिंदू धर्म शास्त्र में सिंदूर को देवी मां का आशीर्वाद माना जाता है। कोशिश करें सिंदूर को माता के मन्दिर से खरीदें। किसी भी आस पास के मंदिर में जहां देवी मां विराजमान हो वहां से सिंदूर जरूर खरीदना चाहिए। अगर मन्दिर नहीं जा सकते तो बाजार से सिंदूर खरीदकर सबसे पहले देवी मां के चरणों में रखें फिर इसे लगा सकते हैं।
किस दिन खरीदे सिंदूर
सिंदूर खरीदने का शुभ दिन शुक्रवार होता है । यह दिन देवी मां का दिन माना जाता है। कोशिश करें शुक्रवार के दिन ही सिंदूर खरीदें।
अपना सिंदूर किसी को न दें
सिंदूर सुहाग की निशानी होता है। अपना सिंदूर किसी के साथ नही बांटना चाहिए। आपके सिंदूर को अलग रखें और इसे किसी के साथ साझा न करें। अगर किसी को सिंदूर की जरूरत पड़ जाए तो इसके लिए पहले से ही अलग सिंदूर निकल कर रख लें और जरूरत पड़ने पर दें सकते हैं।
सिंदूर दान करना शुभ
हिंदू धर्म में सिंदूर लगाना बहुत पवित्र होता है साथ ही सिंदूर का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है । किसी भी व्रत त्योहार पर श्रृंगार की सामग्री के साथ गरीब विवाहित महिला को सिंदूर का दान करने से पति की लंबी आयु होती हैं और गौरी मां की कृपा से सदा सौभाग्यवती रहने का वरदान मिलता है। सिंदूर का दान करने से पहले इसे मां गौरी की मांग में भरे और फिर सुहागिन महिला को दान कर दें।
