Satyanarayan Bhagwan Ki Katha (सत्यनारायण भगवान की कथा): शास्त्रों में ऐसा बताया गया है कि जो भी मनुष्य सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करता है उसे हजार यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सत्यनारायण व्रत कथा में भगवान श्री हरि विष्णु के सत्य स्वरूप के बारे में वर्णन किया गया है। पूर्णिमा तिथि पर इस कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है घर में सत्यनारायण व्रत कथा कराने से सुख-समृद्धि आती है। साथ ही भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। यहां देखें सत्यनाराणय भगवान की कथा।
Shri Satyanarayan Katha In Hindi
पूर्णिमा तिथि बेहद शुभ और पवित्र मानी जाती है। इसलिए ये दिन स्नान और दान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। कहते हैं जो कोई भी पूर्णिमा व्रत का पालन करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और अंत में स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा तिथि पर सत्यनारायण भगवान के नाम का व्रत रखा जाता है। इसलिए इस दिन सत्यनारायण भगवान के मंदिरों में भव्य आयोजन किया जाता है।
सत्यनारायण भगवान व्रत कथा संपूर्ण हिंदी में (Satyanarayan Bhagwan Ki Katha)
हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार सत्यनारायण की कथा करना बेहद शुभ फलदायी होता है। इस कथा को सुनने से मन को शांति मिलती है। लेकिन कथा के लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। इस कथा को करने से पहले केले के पत्तों का मंडप बनाया जाता है। फिर एक चौकी लें उस पर लाल कपड़ा बिछा लें। फिर उस पर भगवान सत्यनारायण की फोटो रखें। साथ में भगवान गणेश की प्रतिमा और कलश भी रखें। सबसे पहले कलश पूजन करें। फिर गणेश जी की पूजा करें और इसके बाद सत्यनारायण भगवान की पूजा करें।
सत्यनारायण भगवान को पंजीरी का भोग लगाया जाता है। साथ में पंचामृत, केला और तुलसी भी रखें। इस दिन भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान भी कराएं। पूजन में फल भी अवश्य रखें। माना जाता है कि इस कथा को पढ़ने और सुनने वाले लोगों की सभी प्रकार की मनोकामना की पूर्ति होती है।
