Durga Ashtami Vrat Katha: दुर्गा अष्टमी व्रत कथा इन हिंदी, यहां से पढ़ें महागौरी माता की व्रत कथा और कहानी

Navratri Day 8 Maa Mahagauri Vrat Katha (महागौरी माता की व्रत कथा): आज शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन है और आज मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी महागौरी को सौम्यता और करुणा की प्रतीक माना जाता है। इस दिन महागौरी की पूजा के साथ व्रत कथा भी पढ़ी जाती है। यहां से आप दुर्गा अष्टमी की व्रत कथा और कहानी पढ़ सकते हैं।

Navratri Day 8 Maa Mahagauri Vrat Katha (महागौरी माता की व्रत कथा): महाअष्टमी (दुर्गा अष्टमी) की पौराणिक कथा अनुसार, प्राचीन काल में असुर दंभ को महिषासुर नाम के एक पुत्र की प्राप्ति हुई थी, जिसके भीतर बचपन से ही अमर होने की प्रबल इच्छा थीं। अपनी इसी इच्छा की पूर्ति के लिए उसने अमर होने का वरदान हासिल करने के लिए ब्रह्मा जी की घोर तपस्या आरंभ की। महिषासुर द्वारा की गई इस कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए और उसे मनचाहा वरदान मांगने को कहा, ऐसे में महिषासुर, जो सिर्फ अमर होना चाहता था। उसने ब्रह्मा जी से वरदान मांगते हुए खुद को अमर करने के लिए उन्हें बाध्य कर दिया।

मां महागौरी व्रत कथा इन हिंदी (pic credit: canva)

परन्तु ब्रह्मा जी ने महिषासुर को अमरता का वरदान देने की बात ये कहते हुए टाल दी कि जन्म के बाद मृत्यु और मृत्यु के बाद जन्म निश्चित है, इसलिए अमरता जैसी किसी बात का कोई अस्तित्व नहीं है। जिसके बाद ब्रह्मा जी की बात सुनकर महिषासुर ने उनसे एक अन्य वरदान मांगने की इच्छा जताई और कहा- कि ठीक है स्वामी, यदि मृत्यु होना तय है तो मुझे ऐसा वरदान दे दीजिए कि मेरी मृत्यु किसी स्त्री के हाथ से ही हो, इसके अलावा अन्य कोई दैत्य, मानव या देवता, कोई भी मेरा वध ना कर पाए।

End of Feed