Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक पवित्र और विशेष पर्व है, जो आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृतमयी मानी जाती हैं। 2025 में शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाई जा रही है। ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक ग्रह हैऔर इस दिन चंद्रदेव के 108 नामों (अष्टोत्तर शतनामावली) का जाप करने से स्ट्रेस, एंग्जाइटी, और डिप्रेशन से मुक्ति मिलती है। यह जाप मन को शांत करता है, भावनात्मक संतुलन लाता है, और चंद्र दोष को दूर करता है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा का महत्व, चंद्रदेव के 108 नाम, और जाप की विधि क्या है?
चंद्रदेव के 108 नामों का करें जाप
चंद्रदेव के 108 नाम जाप का महत्व
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत तुल्य होती हैं, जो स्ट्रेस, एंग्जाइटी, और डिप्रेशन को कम करने में मदद करती हैं। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रदेव के 108 नामों का जाप करने से कुंडली में चंद्र दोष का प्रभाव कम होता है। यह जाप मन को शांत करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और भावनात्मक स्थिरता देता है। शरद पूर्णिमा पर यह जाप विशेष फलदायी है, क्योंकि चंद्रमा पूर्ण शक्ति के साथ होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी चंद्रमा की किरणें मेलाटोनिन हार्मोन को बढ़ाती हैं, जो नींद और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। हालांकि अगर आप कोई चिकित्सकीय इलाज करा रहे हैं तो आपको इस उपाय के साथ भी उसको जारी रखना है।
चंद्रदेव के 108 नाम जाप की विधि
शरद पूर्णिमा की रात स्नान कर स्वच्छ सफेद वस्त्र पहनें। एक चौकी पर चंद्रदेव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। अगर मूर्ति न भी हो तो साक्षात चंद्रमा को देखते हुए एक चांदी के बर्तन में दूध, चावल और सफेद फूल लेकर चंद्रदेव को अर्पित करें। रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से पहले 'ॐ चन्द्रमसे नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद चंद्रदेव के 108 नामों का जाप शुरू करें, प्रत्येक नाम को कम से कम एक बार जपें। जाप रात में 10:53 बजे के बाद करें क्योंकि इस दौरान भद्रा समाप्त होगा। पूजा के बाद खीर को चांदनी में रखें और अगले दिन सुबह भोग लगाकर खाएं।
शरद पूर्णिमा पर खीर का महत्व
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा है। खीर चांदी के बर्तन रखें जो ज्यादा अच्छा रहेगा। खीर में दूध, चावल, चीनी के अलावा इलायची और ड्राई फ्रूट्स भी डालें। इसे रात 10:53 बजे के बाद खुले आसमान में चंद्रमा की रोशनी में रखें और सफेद कपड़े से ढक दें। अगले दिन (7 अक्टूबर) सुबह भगवान को भोग लगाकर परिवार में बांटकर खाएं। यह खीर स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से अस्थमा और त्वचा रोगों में लाभकारी मानी जाती है।
चंद्रदेव के 108 नाम (अष्टोत्तर शतनामावली)
आज के दिन आप चंद्रदेव के इन 108 नामों का जाप कर सकते हैं।
- ॐ श्रीमते नमः
- ॐ शशधराय नमः
- ॐ चन्द्राय नमः
- ॐ ताराधीशाय नमः
- ॐ निशाकराय नमः
- ॐ सुखनिधये नमः
- ॐ सदाराध्याय नमः
- ॐ सतपतये नमः
- ॐ साधुपूजिताय नमः
- ॐ जितेन्द्रियाय नमः
- ॐ जयोद्योगाय नमः
- ॐ ज्योतिश्चक्रप्रवर्तकाय नमः
- ॐ विकर्तनानुजाय नमः
- ॐ वीराय नमः
- ॐ विश्वेशाय नमः
- ॐ विदुषां पतये नमः
- ॐ दोषाकराय नमः
- ॐ दुष्टदूराय नमः
- ॐ पुष्टिमते नमः
- ॐ शिष्टपालकाय नमः
- ॐ अष्टमूर्तिप्रियाय नमः
- ॐ अनन्ताय नमः
- ॐ कष्टदारुकुठारकाय नमः
- ॐ स्वप्रकाशाय नमः
- ॐ प्रकाशात्मने नमः
- ॐ द्युचराय नमः
- ॐ देवभोजनाय नमः
- ॐ कलाधराय नमः
- ॐ कालहेतवे नमः
- ॐ कामकृते नमः
- ॐ कामदायकाय नमः
- ॐ मृत्युसंहारकाय नमः
- ॐ अमर्त्याय नमः
- ॐ नित्यनुष्ठानदायकाय नमः
- ॐ क्षपाकराय नमः
- ॐ क्षीणपापाय नमः
- ॐ क्षयवृद्धिसमन्विताय नमः
- ॐ जैवातरकाय नमः
- ॐ शुचये नमः
- ॐ शुभ्राय नमः
- ॐ जयिने नमः
- ॐ जयफलप्रदाय नमः
- ॐ सुधामयाय नमः
- ॐ सुरस्वामिने नमः
- ॐ भक्तानामिष्टदायकाय नमः
- ॐ भुक्तिदेय नमः
- ॐ मुक्तिदेय नमः
- ॐ भद्राय नमः
- ॐ भक्तदारिद्र्यभञ्जनाय नमः
- ॐ सामगानप्रियाय नमः
- ॐ सर्वरक्षकाय नमः
- ॐ सागरोद्भवाय नमः
- ॐ भयान्तकृते नमः
- ॐ भक्तिगम्याय नमः
- ॐ भवबन्धविमोचकाय नमः
- ॐ जगत्प्रकाशकिरणाय नमः
- ॐ जगदोलनन्दकारणाय नमः
- ॐ निस्सापत्नाय नमः
- ॐ निराहाराय नमः
- ॐ निर्विकाराय नमः
- ॐ निरामयाय नमः
- ॐ भूच्छायाच्छादिताय नमः
- ॐ भव्याय नमः
- ॐ भुवनप्रतिपालकाय नमः
- ॐ सकलार्तिहराय नमः
- ॐ सौम्यजनकाय नमः
- ॐ साधुवन्दिताय नमः
- ॐ सर्वागमज्ञाय नमः
- ॐ सर्वज्ञाय नमः
- ॐ सनकादिमुनिस्तुताय नमः
- ॐ सिताङ्गाय नमः
- ॐ सितभूषणाय नमः
- ॐ श्वेतमाल्याम्बरधराय नमः
- ॐ श्वेतगन्धानुलेपनाय नमः
- ॐ दशाश्वरथसंरूढाय नमः
- ॐ दण्डपाणये नमः
- ॐ धनुर्धराय नमः
- ॐ कुन्दपुष्पोज्ज्वलाकाराय नमः
- ॐ नयनाब्जसमुद्भवाय नमः
- ॐ आत्रेयगोत्रजाय नमः
- ॐ अत्यन्तविनयाय नमः
- ॐ प्रियदायकाय नमः
- ॐ करुणारससम्पूर्णाय नमः
- ॐ कर्कटप्रभवे नमः
- ॐ अव्ययाय नमः
- ॐ चतुरस्रासनारूढाय नमः
- ॐ प्रेमदायकाय नमः
- ॐ सर्वकामगुणावहाय नमः
- ॐ पद्मनाभाय नमः
- ॐ चन्द्रवक्त्राय नमः
- ॐ अमृताय नमः
- ॐ प्रियाय नमः
- ॐ सौम्याय नमः
- ॐ सौभाग्यविधाय नमः
- ॐ शिशुमुखाय नमः
- ॐ शान्तारूपाय नमः
- ॐ शुभप्रदाय नमः
- ॐ शुभाय नमः
- ॐ सवितृमये नमः
- ॐ सहस्रवर्णाय नमः
- ॐ शशिवर्णाय नमः
- ॐ शशिधराय नमः
- ॐ शुभलोचनाय नमः
- ॐ शृंगारप्रियाय नमः
- ॐ सन्मुखाय नमः
- ॐ सुरार्चिताय नमः
- ॐ चन्द्रलोचनाय नमः
- ॐ सुकर्माय नमः
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
