प्रदोष व्रत की कथा, यहां से पढ़ें आज के प्रदोष व्रत की कथा, जानें आज कौन सा प्रदोष व्रत है?

Shani Pradosh Vrat Katha In Hindi (शनि प्रदोष व्रत कथा इन हिंदी): आज यानी 4 अक्टूबर को अश्विन मास का आखिरी प्रदोष व्रत है। जब यह व्रत शनिवार को आता है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है और इस बार ये शनिवार को ही है। कहते हैं कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने से सभी बाधाएं दूर होती हैं। यहां से आप शनि प्रदोष व्रत की कथा पढ़ सकते हैं।

Shani Pradosh Vrat Katha In Hindi (शनि प्रदोष व्रत कथा इन हिंदी): एक समय की बात है अंबापुर गांव में एक ब्रह्माणी निवास करती थी। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था, जिस वजह से वो भिक्षा मांगकर अपना जीवन यापन करती थी। एक दिन जब वह भिक्षा मांगकर लौट रही थी, तो उसे दो नन्हे बालक दुखी अवस्था में मिलें, जिन्हें देखकर वह काफी परेशान हो गई थी। वह सोचने लगी कि इन दोनों बालक के माता-पिता कौन हैं? इसके बाद वह दोनों बच्चों को अपने साथ घर ले आई। कुछ समय के पश्चात वह बालक बड़े हो गएं। एक दिन ब्रह्माणी दोनों बच्चों को लेकर ऋषि शांडिल्य के पास जा पहुंची। ऋषि शांडिल्य को नमस्कार कर वह दोनों बालकों के माता-पिता के बारे में जानने की इच्छा व्यक्त की। तब ऋषि शांडिल्य ने बताया कि ''हे देवी! ये दोनों बालक विदर्भ नरेश के राजकुमार हैं।

शनि प्रदोष व्रत की कथा (pic credit: canva)

गंदर्भ नरेश के आक्रमण से इनका राजपाट छीन गया है। अतः ये दोनों राज्य से पदच्युत हो गए हैं।'' यह सुन ब्राह्मणी ने कहा कि ''हे ऋषिवर! ऐसा कोई उपाय बताएं कि इनका राजपाट वापस मिल जाए।'' जिसपर ऋषि शांडिल्य ने उन्हें प्रदोष व्रत करने के लिए कहा। इसके बाद ब्राह्मणी और दोनों राजकुमारों ने प्रदोष व्रत का पालन भाव के साथ किया।

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