शब-ए-बारात का त्योहार इस साल 13 फरवरी को मनाया जाएगा। इस रात में विशेष नफ्ल नमाजें अदा की जाती हैं। कुछ लोग इस रात को 6 रकात, 12 रकात या 10 रकात पढ़ते हैं। मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस पाक रात में कुरान शरीफ की तिलावत करना सवाब हता है। कहते हैं इस रात में अल्लाह अपने बंदों के सभी गुनाह मांफ कर देते हैं। इसलिए इस रात मुस्लिम लोग खुदा से अपने गुनाहों की मांफी मांगते हैं और अपने परिवार के लिए रहमत और बरकत की प्रार्थना करते हैं। चलिए आपको बताते हैं इस रात की नमाज का तरीका क्या है।
Shab E Barat Namaz Ka Tarika In Hindi
शब-ए-बारात की नमाज का आसान तरीका
शब-ए-बारात की नमाज का सबसे आसान तरीका ये है कि आप 2 रकात करके 12 या 20 रकात पढ़ सकते हैं। इसके लिए पहली रकात में सूरह फातिहा के बाद कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं जैसे सूरह इखलास। दूसरी रकात में आप सूरह फातिहा के बाद फिर कोई भी सूरह पढ़ लें। दो रकात पूरी होने के बाद सलाम फेरें। फिर से दो-दो रकात पढ़ते रहें।
शबे बरात नमाज की नियत
नियत की मैंने दो रकअत शबे बरात की नफ़्ल नमाज की खास वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हू अकबर
शबे बरात की दुआ
अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्येदिना मुहम्मदिव व अला आलि सय्येदिना मुहम्मदिन कमा सललेता अला सय्येदिना इब्राहिम व अला आलि सय्यदीना इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद अल्लाहुम्मा बारिक अला सय्येदिना मुहम्मदिव व अला आलि सय्येदिना मुहम्मदिन कमा बारकता अला सय्येदिना इब्राहिम व अला आलि सय्यदीना इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद
मगरिब की नमाज के बाद पढ़ने वाली नफ़्ल नमाज़ का तरीका
मगगिब की नमाज मस्जिद में अदा की हो या घर पर ! नमाज़ अदा होने के बाद तस्बीह और दुआ से फ़ारिग़ होकर 6 रकअत नमाज़ नफ़्ल 2×2 की नियत से अदा कीजिए। पहली 2 रकअत नमाज़ शुरू करने से पहले यह दुआ कीजिए। या अल्लाह इन दो रकआतो की बरकत से मेरी उम्र में बरकत अता फरमा। शबे बरात की 2 रकअत नमाज़ नफ़्ल की नियत- नियत की मैंने दो रकअत शबे बरात की नफ़्ल नमाज की खास वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हू अकबर। शबे बरात की 2 रकअत नमाज़ नफ़्ल का तरीका- अल्लाह हू अकबर कहकर हाथ बाँध लीजिये ! फिर आप ओर नमाज़ में नफ़्ल अदा करते है। उसी तरह से नफ़्ल नमाज़ अदा कीजिये ! नमाज़ मुकम्मल होने बाद 21 मर्तबा सूरह इखलास और एक मर्तबा सूरह यासीन की तिलावत कीजिये। अगर आप दो जने साथ में नमाज पढ़ते हैं ! 21 मर्तबा सूरह इखलास (कुल्हुवल्लाहु शरीफ ) के बाद जब सूरह यासीन पढ़ने की बारी आये ! तो दोनों में से कोई भी एक सूरह यासीन की तिलावत बुलंद आवाज में कर सकता है ! और दूसरा उस आवाज को सूरह यासीन की तिलावत को बिल्कुल खामोशी के साथ सुने। दूसरा अपनी जुबान से कुछ भी लफ़्ज़ अदा ना करें सिर्फ और सिर्फ सूरह यासीन सुने।
शब-ए-बारात की फातिहा पढ़ने का समय
यह रात के शुरू में (मगरिब के बाद) या फिर रात के बीच (इशा और तहज्जुद के दौरान) में कभी भी पढ़ी जा सकती है। कुछ लोग इसे मगरिब के बाद पढ़ते हैं, तो कुछ इशा और तहज्जुद के बीच पढ़ना पसंद करते हैं। शब-ए-बारात के दिन दिल से की गई इबादत हर समय कुबूल होती है। यही वजह है कि लोग अपने मरहूमों और गुनाहों की माफी मांगने के लिए अल्लाह से दुआ करते हैं।
शब-ए-बारात की फातिहा का तरीका
- दरूद-ए-इब्राहीम - 3 बार
- सूरह काफ़िरून - 1 बार
- सूरह इख़लास - 3 बार
- सूरह फ़लक़ - 1 बार
- सूरह नास - 1 बार
- सूरह फ़ातिहा - 1 बार
- सूरह बक़रह - 1 बार
- आयत-ए-ख़म्सा - 1 बार
- फिर 3 बार दरूद-ए-इब्राहीम पढ़ें।
- नीयत
- वुज़ू
- पाक लिबास
- ध्यान
- तजवीद और तर्तीब
- अदब और खशू
शब-ए-बरात की फातिहा, अल्लाह से मगफिरत और रहमत की दुआ करने का बेहतरीन मौका होता है। इस फातिहा के जरिए मुस्लिम लोग अपनी गलतियों की मांफी मांगते हैं। (नोट- फातिहा का तरीका islamwala.com साइट से लिया गया है)
