Aaj Sehri ka Time kya hai: रमजान के महीने में सेहरी/ सहरी/ शहरी का बहुत खास महत्व होता है। सेहरी वह सुबह का खाना है जो रोज़ा रखने से पहले फज्र की नमाज़ से पहले खाया जाता है। यह सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि इबादत का हिस्सा माना जाता है। सेहरी करने से इंसान को पूरे दिन के रोज़े के लिए ताकत मिलती है और वह भूख-प्यास को बेहतर तरीके से सहन कर पाता है। इस्लाम में सेहरी को सुन्नत बताया गया है और इसमें बरकत मानी जाती है। सेहरी का महत्व केवल शारीरिक ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक तैयारी भी है। सुबह-सुबह उठकर अल्लाह को याद करना, दुआ करना और रोज़े की नीयत करना इंसान के दिल में अनुशासन और सब्र पैदा करता है। यही कारण है कि रमजान में सेहरी को खास अहमियत दी जाती है। यह दिनभर की इबादत की मजबूत शुरुआत होती है।
आज का शहरी कितने बजे से कबतक है, शहर अनुसार समय- (Roza Sehri Timing Today)-
| शहर का नाम | सेहरी का समय |
| दिल्ली | 05:35 AM |
| नोएडा | 05:36 AM |
| हैदराबाद | 05:18 AM |
| लखनऊ | 05:20 AM |
| पटना | 05:30 AM |
| जयपुर | 05:28 AM |
| पुणे | 05:37 AM |
| इंदौर | 05:29 AM |
| बेंगुलरू | 05:22 AM |
रमजान की शहरी की दुआ (Sehri Ki Dua)-
दुआ- व बि सव्मि ग़दन नवैतु मिन शहरी रमज़ान
तर्जुमा- मैंने रमजान के महीने के कल के रोजे की नीयत की।
अर्थ- बिस्मिल्लाहिर् रहमानी रहिम। 'व बि सव्मि ग़दन नवैतु मिन शहरी रमज़ान' दुआ का मतलब है कि आप अगले दिन के रोज़े की नीयत कर रहे हैं। नीयत का मतलब होता है आप मन में यह ठान रहे हैं कि आप अल्लाह के हुक्म के मुताबिक रोज़ा रखेंगे। नीयत बहुत अहम होती है, क्योंकि ये आपके इरादे को मज़बूती देती है। याद रहें अगर आपने पहले से ही रोज़ा रखने की नियत की थी, लेकिन ये दुआ नही पढ़ी और सेहरी का वक्त खत्म हो गया तो ऐसे में आप अपना रोज़ा कंटिन्यू कर सकते हैं। क्योंकि आपने पहले ही रोज़े की नियत कर ली थी। रोज़ा रखने के लिए इस दुआ को पढ़ना लाज़िम और ज़रूरी नहीं है। बस नियत ही काफी है।
अंग्रेजी में शहरी की दुआ (Sehri Ki Dua, Roza Rakhne Ki Dua in English)-
'Wa bisawmi ghadin nawaiytu min shahri Ramadan.'
Meaning- I intend to keep the fast for tomorrow in the month of Ramadan.
अरबी में शहरी की दुआ (Sehri Ki Dua, Roza Rakhne Ki Dua in Arabic)-
وَبِصَوْمِ غَدٍ نَوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ
अगर कोई व्यक्ति सिर्फ दिल में यह इरादा कर ले कि वह अल्लाह की रज़ा के लिए रोज़ा रख रहा है, तो उसकी नीयत पूरी मानी जाती है।
शहरी की नियत (Sehri Karne Ki Niyat)-
रमजान के रोज़े की सेहरी (सहरी) की नियत दिल से की जाती है। नियत का मतलब है दिल में यह इरादा करना कि आप अल्लाह की रज़ा के लिए रमजान का रोज़ा रख रहे हैं। इसके लिए ज़ुबान से शब्द कहना ज़रूरी नहीं है, लेकिन लोग आसानी के लिए दुआ पढ़ लेते हैं।
नियत के शब्द इस प्रकार हैं-
“नवैतु सौमा ग़दिन् अ़न अदा-इ फ़र्ज़ि रमज़ाना हाज़िहिस्सनति लिल्लाहि तआला।”
अर्थ-मैंने अल्लाह तआला के लिए इस साल रमजान के फ़र्ज़ रोज़े की कल नीयत की।
अगर कोई व्यक्ति सिर्फ दिल में यह पक्का इरादा कर ले कि वह आज रमजान का रोज़ा रख रहा है, तो भी उसकी नियत हो जाती है। नियत का समय सेहरी से लेकर फज्र की नमाज़ शुरू होने तक होता है।
शहरी करने का तरीका (Sehri Karne Ka Tarika)-
रमजान में सेहरी (सहरी) करने का तरीका यह है कि मुसलमान फज्र की नमाज़ से पहले सुबह-सुबह उठकर भोजन करते हैं ताकि पूरे दिन के रोज़े के लिए ऊर्जा मिल सके। सेहरी का समय फज्र से पहले तक होता है, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान हल्का लेकिन पौष्टिक भोजन करना अच्छा माना जाता है, जैसे दूध, खजूर, फल, दही, रोटी या दलिया, ताकि दिनभर कमजोरी महसूस न हो। अधिक पानी पीना भी आवश्यक है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। सेहरी के बाद रोज़े की नीयत की जाती है और फज्र की नमाज़ अदा की जाती है। सेहरी करना सुन्नत माना जाता है और इसमें बरकत होती है, इसलिए इसे महत्व दिया जाता है।
