Sawan Somwar Pradosh Kaal: सावन सोमवार के प्रदोष काल का क्या महत्व है, जानें कैसे करें शिवजी की पूजा और जलाभिषेक

Sawan Somwar Pradosh Kaal: सावन सोमवार को प्रदोष काल में शिव पूजा क्यों की जाती है? जानें प्रदोष काल कब होता है, प्रदोष काल में घर या मंदिर में जलाभिषेक की विधि। सोमवार के प्रदोष काल में क्या करें-क्या नहीं।

Sawan Somwar Pradosh Kaal: सावन सोमवार की पूजा का जिक्र आते ही आमतौर पर सुबह मंदिर जाने, शिवलिंग पर जल चढ़ाने और व्रत रखने की बात होती है। लेकिन यदि किसी कारण सुबह जलाभिषेक न हो पाए तो क्या शाम को पूजा की जा सकती है? ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज कहते हैं कि शिव उपासना के लिए सूर्यास्त के आसपास का प्रदोष काल विशेष माना गया है। सावन, सोमवार और प्रदोष काल- ये तीनों भगवान शिव से जुड़े हैं, इसलिए इनका संयोग पूजा को और खास बना देता है।

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सावन मास के सोमवार पर प्रदोष काल का महत्व, क्या कर सकते हैं जलाभिषेक

हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। हर दिन सूर्यास्त के आसपास प्रदोष काल आता है, जबकि प्रदोष व्रत केवल त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इसलिए प्रत्येक सावन सोमवार की शाम प्रदोष काल में शिव पूजा की जा सकती है, भले ही उस दिन त्रयोदशी तिथि न हो।

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