Sawan Somwar 2026 Today Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Mantra & Vrat Niyam: 30 जुलाई से सावन के पवित्र माह का आरंभ हुआ था, जिसका पहला सोमवार आज 3 अगस्त 2026 को है। आज प्रात: काल में श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी, जो देर रात 10 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। वैसे तो सावन का हर दिन खास होता है, लेकिन सावन सोमवार शिव जी की उपासना के लिए काफी महत्वपूर्ण, शुभ और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार के दिन विधि-विधान से भोलेबाबा की पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस दिन शिव भक्त सुबह से ही मंदिरों में शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने के लिए पहुंच जाते हैं।
आज सावन सोमवार व्रत की पूजा कब और कैसे करें?
अगर आप भी आज शिव पूजा और सोमवार व्रत करने जा रहे हैं तो पहले दिनभर के शुभ मुहूर्त, महादेव की पूजा की सही विधि और व्रत के नियम जान लें।
सावन के पहले सोमवार के शुभ मुहूर्त क्या हैं?
| शुभ मुहूर्त के नाम | समय |
| सूर्योदय | सुबह 05:44 बजे |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक |
| प्रातः सन्ध्या | सुबह 04:40 बजे से 05:44 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:42 बजे से 03:35 बजे तक |
| अमृत काल | शाम 05:07 बजे से 06:45 बजे तक |
| प्रदोष काल | शाम 06:26 बजे से 07:56 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 07:11 बजे से 07:32 बजे तक |
| सायाह्न सन्ध्या | शाम 07:11 बजे से 08:14 बजे तक |
| निशिता मुहूर्त | रात 12:06 बजे से 12:49 बजे तक (4 अगस्त) |
सावन सोमवार व्रत की पूजन विधि क्या है?
आज ब्रह्म मुहूर्त से पहले उठ जाएं। स्नान आदि कार्य करने के बाद हरे, सफेद या पीले रंग के कपड़े धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में शिव जी के साकार रूप की मूर्ति-तस्वीर और शिवलिंग की स्थापना करें। हाथ में जल, पुष्प या अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग का जल, गंगाजल या पंचामृत से अभिषेक करें। इस समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। अब शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, अक्षत, चंदन, धतूरा, अनाज, फल, तिल और शमी के पत्ते अर्पित करें। शिव जी के साकार रूप की पूजा करें और उन्हें भी पूजा सामग्री अर्पित करें। घी का दीपक जलाने के बाद सावन सोमवार व्रत की कथा पढ़ें। अंत में आरती करके पूजा का समापन करें। इस विधि से शाम के समय फिर से पूजा करें, जिसके बाद या अगले दिन आप अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।
सावन सोमवार की पूजा के लिए कौन से मंत्र जपने चाहिए?
- पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय
- रुद्र मंत्र: ॐ नमो भगवते रुद्राय
- महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
- शिव नमस्कार मंत्र: ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च॥
- प्रणाम मंत्र: करपूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
- शिव ध्यान मंत्र: ध्यायेत् नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रानं तं रत्नोज्ज्वलांगम् परशुमृगवराभीति हस्तं प्रसन्नम्॥
- क्षमा प्रार्थना मंत्र: अपराधसहस्रं क्रियतेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥
सावन सोमवार व्रत के नियम क्या हैं?
यदि आप सावन सोमवार का व्रत रख रहे हैं तो सुबह और शाम दोनों समय शिव जी के साकार रूप के साथ शिवलिंग की पूजा करें। व्रत के दौरान तन और मन दोनों तरीके से शुद्ध रहें। इस दिन दोपहर के समय सोने से बचें और ज्यादा से ज्यादा भगवान शिव का ध्यान करें। व्रत का पारण करने से पहले दान जरूर करें।
