Sankashti Chaturthi Katha: गजानन संकष्टी चतुर्थी पर पढ़ें ये कथा, व्रत में पढ़ने से दूर होंगे सारे कष्ट

Sawan Ganesh chaturthi vrat katha (संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा): आज सावन महीने की गजानन संकष्टी चतुर्थी है। इस दिन गणेश जी का व्रत रखा जाता है। व्रत के साथ ही पाठ करना भी शुभ माना जाता है। यहां आप सावन गणेश चतुर्थी व्रत की कथा हिंदी में पढ़ सकते हैं।

Sawan Ganesh chaturthi vrat katha (संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा): हर महीने की चतुर्थी तिथि के दिन गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इसे संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की पूजा को समर्पित है। आज सावन मास की संकष्टी चतुर्थी है। आज गणेश भगवान की पूजा के साथ चंद्रदेव की पूजा भी की जाएगी। यहां से आप संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (photo source: canva)

Sankashti Chaturthi Ki Katha In Hindi-

पौराणिक कथा के अनुसार सबसे पहले सावन महीने की संकष्टी चतुर्थी का व्रत महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने किया था। जब युधिष्ठिर अपने चारों भाईयों के साथ वन में थे। तब उन्होंने कृष्ण ने अपने कष्टों के बारे में पूछा। युधिष्ठिर के बार कृष्ण से पूछते हैं कि हे भगवन ऐसा कौन सा उपाय है जिसके द्वारा हम अपने कष्टों से छुटकारा पा सकते हैं। तब भगवान कृष्ण ने कहा हे राजन। सारी इच्छाओं को पूरा करने वाला और विघ्नों का नाश करने वाला एक महान गुप्त व्रत है। इस व्रत के बारे में अभी तक मैंने किसी को कुछ नहीं बताया है। प्राचीन समय की बात है जब पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, लेकिन पार्वती की तपस्या से जब शिव प्रसन्न नहीं हुए तब माता पार्वती ने गणेश जी का स्मरण किया। भगवान गणेश उसी समय प्रकट हो गए। पार्वती ने गणेश जी से पूछा कि मैंने इतना कठोर तप किया फिर भी शिव मुझसे प्रसन्न नहीं हुए।

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