Sankarshan Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह आने वाली चतुर्थी तिथि भगवान गणेश (Bhagwan Ganesh) की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को संकर्षण चतुर्थी कहा जाता है, जिसका विशेष महत्व संकटों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति से जुड़ा माना जाता है। हर बार श्रद्धालुओं के मन में यही सवाल रहता है कि व्रत किस दिन रखा जाए - तिथि वाले दिन या सूर्योदय के आधार पर। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में संकर्षण चतुर्थी का सही व्रत दिन और पूजा समय।
संकर्षण चतुर्थी 2026 की डेट कब है
संकर्षण चतुर्थी 2026 की डेट - 20 या 21 अप्रैल कब है
पंचांग गणना के अनुसार वैशाख शुक्ल चतुर्थी तिथि 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7:27 बजे प्रारम्भ हो रही है और 21 अप्रैल 2026 को सुबह 4:14 बजे समाप्त होगी। यानी चतुर्थी तिथि का विस्तार लगभग 14 घंटे 36 मिनट तक रहेगा।
धार्मिक नियमों के अनुसार संकर्षण चतुर्थी व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि विद्यमान हो। इस आधार पर वर्ष 2026 में संकर्षण चतुर्थी का व्रत सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को ही रखा जाएगा। इसलिए भ्रम की स्थिति में न पड़ें - व्रत 21 अप्रैल को नहीं, बल्कि आज ही 20 अप्रैल को संकर्षण चतुर्थी का व्रत है।
संकर्षण चतुर्थी 2026 का शुभ पूजा मुहूर्त
इस दिन भगवान गणेश की पूजा मध्याह्न काल में करना विशेष फलदायी माना जाता है। चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 13:38 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 2 घंटे 36 मिनट की होगी। मान्यता है कि इस समय गणपति की पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
संकर्षण चतुर्थी 2026 का वर्जित चन्द्र दर्शन का समय
संकर्षण चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से जुड़ी विशेष मान्यता भी प्रचलित है। इस दिन भूलवश भी चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। आज संकर्षण चतुर्थी 2026 का वर्जित चन्द्रदर्शन समय शाम 7:44 बजे से रात 10:20 बजे तक रहेगा।
धार्मिक कथा के अनुसार चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन से मिथ्या कलंक लगने की आशंका मानी जाती है, इसलिए श्रद्धालु इस समय सावधानी बरतते हैं।
क्यों खास मानी जाती है संकर्षण चतुर्थी
संकर्षण शब्द का अर्थ है - संकटों को दूर करने वाला। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से मानसिक तनाव, आर्थिक बाधाएं और पारिवारिक परेशानियां कम होने की मान्यता है। कई लोग इस व्रत को संतान सुख, विवाह योग और कार्य सिद्धि के लिए भी रखते हैं।
विशेष रूप से सोमवार को पड़ने वाली संकर्षण चतुर्थी का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव और गणेश दोनों की कृपा से जुड़ा माना जाता है।
संकर्षण चतुर्थी के व्रत और पूजा की सरल विधि
सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थान में गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दूर्वा, मोदक, लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करें। गणेश मंत्र या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दिनभर फलाहार व्रत रखकर मध्याह्न मुहूर्त में पूजा पूर्ण करें।
यानी अब यह स्पष्ट है कि संकर्षण चतुर्थी 20 अप्रैल को है या 21 अप्रैल को, तो पंचांग के अनुसार स्पष्ट रूप से व्रत 20 अप्रैल 2026, सोमवार को ही रखा जाएगा। सही मुहूर्त में की गई गणेश पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ परिणाम लेकर आती है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत भक्तों के लिए सुख, शांति और सफलता का मार्ग खोलने वाला माना गया है।
